भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

पृष्ठ 1118, कुल 2600 में से

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पृष्ठ 1118

... wait, look at: "रूपभेदानापादकत्वाच्चामैव ।" Wait, is that "च्चामैव" or "न्नामैव" or "न्नानैव" or "त्तन्नामैव"? Let's look closely at L11: "रूपभेदानापादकत्वात्..." Then: "त्तन्नामैव" or "न्नामैव" or "त्तन्नावैव"? Look at: "त्वा" then "त्" (halanta) or "त्" doubled? Wait: "...पादकत्वात् तन्नामैव" -> in sandhi, त् + त = त्त: "...पादकत्वात्तन्नामैव ।" Wait, look at the glyphs: "कत्वा" then "त्त" then "न्ना"? No, "न्नामैव"! Look at L25: "नामैवेति तथा च..." Rashmi in L25 says: "नामैवेति तथा च कार्ये धेयप्रत्ययः इति भावः ।" So the word in the Prakash text is "नामैव"! Before "नामैव", is it: "...पादकत्वात्"? Wait, look at: "...पादकत्वा" then what? Is it "...पादकत्वान्नामैव ।"? त् + न = न्न: "...पादकत्वान्नामैव ।"! Yes! -त्वात् + नामैव = -त्वान्नामैव! Wait, look at the scan: