भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

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पृष्ठ 2326

', the ligature is स् + त = स्त? No, 'क्त' is क् + त. Before 'क्त', there is 'स': 'सक्त'. Now look at L30: म + नो + स + क्ता + यां = मनोसक्तायां? Or मनःसक्तायां? Or मनोऽसक्तायां? Wait, if the mind is dissolved: "मनसोपि चन्द्रे लयात्" (L14). When manas is dissolved, there is NO attachment, or manas cannot function. But wait, why "मनोसक्तायां मुक्तौ वक्तुम्"? Wait! Look at the phrase: L13-14: "इन्द्रियाणां लये मनसोपि चन्द्रे लयात् [...] साधनाभावान्न मुक्तिर्वक्तुं शक्या ।" And L30 glosses "वक्तुमिति ।": "वक्तुमिति । [...] मुक्तौ वक्तुम् ।" Wait, why would it say "... मुक्तौ वक्तुम्"? What kind of mukti? "मनोसत्तायां मुक्तौ वक्तुम्"? WAIT! Look at that word! "मनोसत्तायां"! Is that double 'त' (त्त) or 'क्त'? Look at 'त्त' in 'वृत्त' or 'प्रवृत्त': Does it have a loop? No, look: स + त् + त = सत्ता! "मनोसत्तायां मुक्तौ वक्तुम् ।" = "To