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भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

पृष्ठ 2537, कुल 2600 में से

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पृष्ठ 2537

-like shape at bottom, which is 'छ'! So it's definitely 'च्छि'.

प्रतिबन्धेत्यादि । प्रतिबन्धासुरं दूरीकृत्य भक्तमनोरथः । पूरितः स्वप्रियां नीत्वा तथा मेऽस्तु मनोरथः ॥ १ ॥ असुरो रावणः भक्तो हनुमान्, 'विष्णुभक्तं हनुमन्तमिदं ब्रुवन्' इति श्रुतिर्हेतुमदुपनिषदि । Wait, line 28: असुरो रावणः भक्तो हनुमान्, 'विष्णुभक्तं हनुमन्तमिदं ब्रुवन्' इति श्रुतिर्हेतुमदुपनिषदि । Wait, 'श्रुतिर्हेतुमदुपनिषदि' or 'श्रुतिर्मुद्गलोपनिषदि'? LOOK AT THAT WORD: श्रु-ति-र्- then: मु-द्-ग-ल-ो-प-नि-ष-दि ! Look at the first letter after 'श्रुतिर्': It has an 'उ'-kāra at the bottom! It's 'मु'! Then 'द्ग' (da + ga conjunct)! Then 'ल' with 'ो' = 'लो'! Then 'पनिषदि'! It is: श्रुतिर्मुद्गलोपनिषदि !! M