अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअग्निर्भूतपतिर्नित्यं ब्राह्मणानां बृहस्पतिः ॥ ८ ॥ उष्णप्रभाके अधिपति सूर्य हैं और ताराओंके स्वामी चन्द्रमा कहे गये हैं। भूतोंके नित्य अधीश्वर अग्निदेव हैं तथा ब्राह्मणोंके स्वामी बृहस्पति हैं ॥ ८ ॥ ओषधीनां पतिः सोमो विष्णुर्बलवतां वरः । त्वष्टाधिराजो रूपाणां पशूनामीश्वरः शिवः ॥ ९ ॥ ओषधियोंके स्वामी सोम हैं तथा बलवानोंमें श्रेष्ठ विष्णु हैं। रूपोंके अधिपति सूर्य और पशुओंके ईश्वर भगवान् शिव हैं ॥ ९ ॥ दीक्षितानां तथा यज्ञो देवानां मघवा तथा । दिशामुदीची विप्राणां सोमो राजा प्रतापवान् ॥ १० ॥ दीक्षा ग्रहण करनेवालोंके यज्ञ और देवताओंके इन्द्र अधिपति हैं। दिशाओंकी स्वामिनी उत्तर दिशा है एवं ब्राह्मणोंके राजा प्रतापी सोम हैं ॥ १० ॥ कुबेरः सर्वरत्नानां देवतानां पुरंदरः । एव भूताधिपः सर्गः प्रजानां च प्रजापतिः ॥ ११ ॥ सब प्रकारके रत्नोंके स्वामी कुबेर, देवताओंके स्वामी इन्द्र और प्रजाओंके स्वामी प्रजापति हैं। यह भूतोंके अधिपतियोंका सर्ग है ॥ ११ ॥ सर्वेषामेव भूतानामहं ब्रह्ममयो महान् । भूतं परतरं मत्तो विष्णोर्वापि न विद्यते ॥ १२ ॥ मैं ही सम्पूर्ण प्राणियोंका महान् अधीश्वर और ब्रह्ममय हूँ। मुझसे अथवा विष्णुसे बढ़कर दूसरा कोई प्राणी नहीं है ॥ १२ ॥ राजाधिराजः सर्वेषां विष्णुर्ब्रह्ममयो महान् । ईश्वरत्वं विजानीध्वं कर्तारमकृतं हरिम् ॥ १३ ॥ ब्रह्ममय महाविष्णु ही सबके राजाधिराज हैं, उन्हींको ईश्वर समझना चाहिये। वे श्रीहरि सबके कर्ता हैं, किंतु उनका कोई कर्ता नहीं है ॥ १३ ॥ नरकिन्नरयक्षाणां गन्धर्वोरगरक्षसाम् । देवदानवनागानां सर्वेषामीश्वरो हि सः ॥ १४ ॥ वे विष्णु ही मनुष्य, किन्नर, यक्ष, गन्धर्व, सर्प, राक्षस, देव, दानव और नाग सबके अधीश्वर हैं ॥ १४ ॥ भगदेवानुयातानां सर्वासां वामलोचना । माहेश्वरी महादेवी प्रोच्यते पार्वती हि सा ॥ १५ ॥ उमां देवीं विजानीध्वं नारीणामुत्तमां शुभाम् । रतीनां वसुमत्यस्तु स्त्रीणामप्सरसस्तथा ॥ १६ ॥ कामी पुरुष जिनके पीछे फिरते हैं, उन सबमें सुन्दर नेत्रोंवाली स्त्री प्रधान है। एवं जो माहेश्वरी, महादेवी और पार्वती नामसे कही जाती हैं, उन मंगलमयी उमादेवीको स्त्रियोंमें