अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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उत्तङ्क उवाच नागलोके यदि ब्रह्मन् न शक्ये कुण्डले मया । प्राप्तुं प्राणान् विमोक्ष्यामि पश्यतस्तु द्विजोत्तम ।। ३४ ।। उत्तंकने कहा—ब्रह्मन्! द्विजश्रेष्ठ! यदि नागलोकमें जाकर उन कुण्डलोंको प्राप्त करना मेरे लिये असम्भव है तो मैं आपके सामने ही अपने प्राणोंका परित्याग कर दूँगा ।। ३४ ।। वैशम्पायन उवाच यदा स नाशकत् तस्य निश्चयं कर्तुमन्यथा । वज्रपाणिस्तदा दण्डं वज्रास्त्रेण युयोज ह ।। ३५ ।। वैशम्पायनजी कहते हैं—राजन्! वज्रधारी इन्द्र जब किसी तरह उत्तंकको अपने निश्चयसे न हटा सके, तब उन्होंने उनके डंडेके अग्रभागमें अपने वज्रास्त्रका संयोग कर दिया ।। ३५ ।। ततो वज्रप्रहारैस्तैर्दार्यमाणा वसुन्धरा । नागलोकस्य पन्थानमकरोज्जनमेजय ।। ३६ ।।