भारतकोश
अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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सृष्टि उत्पत्ति से पहले का रहस्य

धर्मदास पूछते हैं

अब साहब मोहि देउ बताई । अमर-लोक सो कहाँ रहाई ॥ कौन द्वीप हंस को बासा । कौन द्वीप पुरुष रह बासा ॥ भोजन कौन हंस तहाँ करई । औ बानी कहीं तहाँ उच्चरई ॥ कैसे पुरुष लोक रच राखा । द्वीपहिं को कैसे अभिलाखा ॥ तीन लोक उत्पत्ति भाखो । वर्णहु सकल गोय जनि राखो ॥ काल निरंजन किस विधि भयऊ । कैसे षोडश सुत निर्मयऊ ॥ कैसे चार खानि विस्तारी । कैसे जीव काल वश डारी ॥ कैसे कूर्म शेष उपराजा । कैसे मीन बराहहिं साजा ॥ त्रय देवा कौने विधि भयऊ । कैसे महि अकाश निरमऊ ॥ चन्द्र सूर्य कहु कैसे भयऊ । कैसे तारागण सब उयऊ ॥ किस विधि भई शरीर की रचना । भाषो साहिब उत्पत्ति बचना ॥

हे साहिब ! कृपा करके अब मुझे बताओ कि वो अमर लोक कहाँ है ? उस अमर लोक में जीव किस स्थान पर रहते हैं ? वहाँ आत्मा भोजन क्या करती है और वहाँ भाषा कौन सी है ? सब लोक कैसे बने ? तीन-लोक की उत्पत्ति कैसे हुई ? काल-पुरुष कैसे हुआ ? सोलह सुत की रचना कैसे हुई ? यह निर्मल आत्मा चार खानियों में कैसे गयी ? आत्माएँ काल-पुरुष के चंगुल में कैसे फँस गयीं । त्रिदेव कैसे बने ? पृथ्वी और आकाश कैसे बने ? सूर्य, चाँद और तारे आदि कैसे बने ? हे सदगुरु ! कृपा करके सृष्टि का सारा भेद मुझे समझाकर कहिए, जिससे मेरा सब संशय दूर हो ।

आदि उत्पत्ति कहो सतगुरु, कृपा करो निज दास को । बचन सुधा सु प्रकाश कीजै, नाश हो यम त्रास को ॥

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