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अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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साहिब बन्दगी

निरंजन ने कहा कि जीव और बीज तुम्हारे पास हैं और ये तीनों पुत्र भी तुम्हें सौंपता हूँ। अब मैं निराकार रूप में शून्य में समाऊँगा और मन बनकर हर जीव के साथ रहूँगा और तुम तीनों पुत्रों के साथ राज्य करना। निरंजन ने कहा कि तुम मेरा भेद किसी से नहीं कहना, मेरा दर्शन तीनों पुत्रों में से कोई नहीं कर सकेगा, चाहे मुझे खोजते हुए जन्म क्यों न गँवा दै, और मेरा कोई भेद भी न जान पाए। जब ये बड़े हो जाएँ तो इन्हें समुद्र मंथन के लिए भेजना।

मन ही सरूपी देव निरंजन, तोहि रहा भरमाई। पांच पचीस तीन का पिंजड़ा, जामें तोहि राखा भरमाई॥