भारतकोश
अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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संसार से अलग ?

हमारा पंथ भक्ति जगत में वैज्ञानिक तरीके से क्रांति लाया है। सबसे पहले पाँच बातें पूरे संसार को अलग बता रहें हैं। * ये काल का देश है। यहाँ निरंजन का राज्य है * योगेश्वर इस स्थान तक बहुत मुश्किल से जाते हैं। ये चौदहवा लोक है। * इसी को वेदों ने निराकार, निरंकार, निरंजन, पार ब्रह्मा आदि नामों से पुकारा है। गण, गंधर्व, सिद्ध, साधक, ऋषि मुनि, पीर पैगम्बर आदि यहाँ तक गये।

  • इसके आगे महा शून्य है, यहाँ कोई वस्तु नहीं है। इसके नाम अचिन्त लोक, सोहंग लोक, मूल सुरति लोक, अंकुर लोक, इच्छा लोक, वाणी लोक और सहज लोक हैं यह समस्त लोक महा शून्य में हैं। सहज अंश तक जो भी सृष्टि है इसका परम नाश है।

सहज पुरुष तक जेतक भाखा, यह रचना परलै ते राखा ॥ आगे अछय लोक है भाई, आदि पुरुष यहाँ आप रहाई ॥

  • इसके ऊपर अमरधाम परम पुरुष का लोक है। यहाँ कभी भी परलय नहीं है।

जहवां से हंसा आया, अमर है वो लोकवा ॥ तहाँ नहीं परले की छाया, नहीं तहाँ कछु मोह और माया ॥ ज्ञान ध्यान को तहाँ न लेखा, पाप पुण्य तहंवा नहीं देखा ॥ पवन न पानी पुरुष न नारी, हद अनहद तहं नाहिं विचारी ॥

यहीं से साहिब आत्माओं के कल्याण के लिए आते हैं।