अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूत्र-३८ 177 ग्रामाणां च तथा सङ्ख्या देशानां च प्रमाणतः । राज्ञां च युक्तिमानं च अलङ्कारैस्तद्रूपतः ॥ २ ॥ अब यहाँ के ग्रामों तथा देशों की प्रमाणतः संख्या और यहाँ के राजागणों के युक्तिमान और उनके अनुरूप अलङ्करणों यानी पदवियों को बताता हूँ।¹ कान्यकुब्जे ग्रामसङ्ख्या षट्त्रिंश₃₆ल्लक्षकाणि च । अष्टादश₁₈ लक्षमानं राज्यं गौडेश्वरे मतम् ॥ ३ ॥ कान्यकुब्ज की ग्राम संख्या छत्तीस लाख है और यहाँ के राजा गौड़ेश्वर की पदवी या उपाधि धारण करते हैं जिनकी आय अठारह लाख मान कही गई है। तदर्ध₁₈ कामरूपाश्च तत्समं मण्डलेश्वरम् । कार्त्तिकपुरे तत्सङ्ख्या चौडे लक्षद्वासमतिः₁₄॥ ४ ॥ इसका आधा कामरूप या आसाम है जहाँ के मण्डलेश्वर की पदवी प्राप्त राजा की आय भी इसी के अनुरूप आधी है। कार्त्तिकपुर में भी संख्या उतनी ही अर्थात् अठारह लाख है और यहाँ के अधीश्वर चौड़ कहलाते हैं जिनकी (वार्षिक) आय चौदह लाख है।
- स्कन्दपुराण के माहेश्वरखण्ड-कुमारिकाखण्ड में राजा शतशृङ्ग के उत्तराधिकारियों के वर्णन में कुलदेवी कुमारी द्वारा भारतवर्ष के नौ खण्डों के बहत्तर विभाग करने का वर्णन है। इसमें मण्डल प्रदेश में चार करोड़ ग्राम व बालाक प्रदेश में ढाई करोड़ ग्राम निर्धारित किए गए। प्रदेशानुसार ग्रामों की संख्या इस प्रकार दी गई है— खुरासाहणक = सवा करोड़ ग्राम, अन्थल = चार लाख, नेपाल = एक लाख, कान्यकुब्ज = छत्तीस लाख, जनक = बहत्तर लाख, गौड़ = अठारह लाख, कामरूप = नौ लाख, लाहर्व व भालदेश = नौ-नौ लाख, कान्तिपुर = नौ लाख, माचिपुर = नौ लाख, जालन्धर व लोहपुर = नौ लाख, पाम्बीपुर व रटराज = सात-सात लाख, हरिआल = पाँच लाख, इड् = साढ़े तीन लाख, षाम्भण वाहक = साढ़े तीन लाख, नीलपुर = इक्कीस हजार, अम्ल = एक लाख, नरेन्द्र = सवा लाख, तिलङ्ग = सवा लाख, मालव = अठारह लाख बानवे हजार, सयम्भर = सवा लाख, मेवाड़ = सवा लाख, बागुरि = अस्सी हजार, गुर्जर = सत्तर हजार, पाण्डु = सत्तर हजार, तेजाकुति = बयालीस हजार, काश्मीर मण्डल = अड़सठ हजार, कौङ्कण = छत्तीस हजार, लघु कौङ्कण = चौदह सौ चालीस, सौराष्ट्र = पचपन हजार, ताड़ = इक्कीस हजार, अतिसिन्धु, अश्वमुख, सजानुहुति, वेणु, द्रविड़, भद्राश्व एवं देवभद्रार्श्व = दस-दस हजार, चिरायुष व यमकोटि = छत्तीस-छत्तीस हजार, रोमक = अठारह करोड़, कामरु, कर्णाटक तथा जाङ्गल = सवा- सवा लाख, स्त्रीराज्य = पाँच लाख, पुलस्ति = दस लाख, काम्बोज व कौशल = दस-दस लाख, वाहीक = चार लाख, लङ्का = छत्तीस हजार, वर्धमान = चौसठ हजार, सिंहलद्वीप = दस हजार, पाण्ड्य = छत्तीस हजार, भयानक = एक लाख, वरेन्द्रक = तीस हजार, मूलस्थान = पच्चीस हजार, यवन = चालीस हजार, पक्षबाहु = चार हजार ग्राम है। इस प्रकार बहत्तर देशों और उनके ग्रामों की संख्या है। भारतवर्ष के कुल ग्रामों की संख्या 96 करोड़, 72 लाख व 36 हजार है। (कुमारिकाखण्ड 39, 125-163)