अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें198 अपराजितपृच्छा संख्या 15 के लिए तिथि और मासार्ध को पर्याय कहा गया है। कला द्विरष्ट तृपभृङ्गा पक्षैक बिन्दुषोडशानाम्। संख्या 16 के लिए कला, द्विरष्ट, तृपभृङ्ग, पक्षैक, बिन्दु और षोडश ये सोलह के पर्याय हैं। जन्मपक्षरंभोभ्यासश्चेति द्विरष्टैकन्यून सप्तदशानाम्। संख्या 17 के लिए जन्मपक्षरंभोभ्यास ? द्विरष्टैकन्यून (8 + 8 + 1 = 17) — ये सप्तदश संख्या के पर्याय (स्पष्ट नहीं है)। वेदाङ्गस्मृति शान्ति विभूति पौराण्यभवोद्भव महाव्रत मेघराजश्चाष्टादशानाम्। संख्या 18 के लिए वेदाङ्ग, स्मृति, शान्ति (आहुति- वैष्णवी, ऐन्द्री, ब्राह्मी, रौद्री, वायव्या, वारुणी, कौबेरी, भार्गवी, प्राजापत्या, त्वाष्ट्री, कौमारी, वह्निदेवता, मारुद्गणा, गान्धारी, नैर्ऋतकी, आङ्गिरसी, याम्या, सर्वकामदा, पार्थिवी- अग्निपुराण 264, 7-9), विभूति, पुराण, भवोद्भव, महाव्रत, मेघराज— ये अठारह संख्या के पर्याय हैं। अधृति अतृप्ति विफला अमोघात्वेकोनविंशतिः। संख्या 19 के लिए अधृति, अतृप्ति, विफला, अमोघा— ये एकोनविंशति यानी उन्नीस के पर्याय हैं। नखविश्वा विश्वपार स्वन्ती धृतीप्ति स्याद्विंशतिः। संख्या 20 के लिए नख, विश्वा, विश्वपार, स्वन्ती, धृतीप्ति— ये बीस संख्या के पर्याय हैं। त्रिषाक्रान्तामूर्च्छनास्तेकविंशतिः। कृष्णाक्रान्ता भूर्ध्यानां त्वेकविंशतिः। संख्या 21 के लिए त्रिषाक्रान्ता, मूर्च्छना, कृष्णाक्रान्ता, भूर्ध्याना— ये इक्कीस संख्या पर्याय है। श्रुत्याऽहुत्याक्रमानां द्वाविंशत्तिः।¹ संख्या 22 के लिए श्रुतियाँ (सङ्गीत में तीव्रा, कुमुद्वती, मन्दा, छन्दोवती, दयावती, रञ्जनी, रक्तिका, रौद्री, क्रोधी, वज्रिका, प्रसारिणी, प्रीति, मार्जनी, क्षिति, रक्ता, सन्दीपिनी, आलापिनी, मदन्ती, रोहिणी, रम्या, उग्रा एवं क्षोभिणी श्रुतियाँ
- तृसृतां स्वामारोप्या द्वाविंशतिः ? इति प्रकाशित पाठः।