भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

पृष्ठ 336, कुल 535 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 336

290 अपराजितपृच्छा इति सूत्रसन्तानगुणकीर्तिप्रकाशप्रोक्तश्रीभुवनदेवाचार्योक्तापराजितपृच्छायां महेश्वरशुक्रसंवादे वास्तूत्पत्त्यधिकारो नाम चतुःपञ्चाशत्तमं सूत्रम् ॥ 54 ॥ इस प्रकार भुवनदेवाचार्य कृत सूत्रसन्तानगुणकीर्ति प्रकाश या अपराजितपृच्छा में महेश्वर- शुक्र संवाद में वास्तु उद्भव अधिकार नामक चौपनवाँ सूत्र पूर्ण हुआ ॥ 54 ॥ वास्तूत्पत्त्यधिकारे देवतान्यासो नाम पञ्चपञ्चाशत्तमं सूत्रम् ॥ 55 ॥ विश्वकर्मोवाच — ईशस्तु संस्थितो मूर्ध्नि पर्जन्यः कर्णयोर्दितिः । जयादिती स्कन्धयोश्च ह्युभयोर्वामदक्षिणम् ॥ 1 ॥ (अब वास्तुपुरुष पर देवताओं की न्यास स्थिति बताई जा रही है) विश्वकर्मा बोले कि वास्तुपुरुष के मुँह पर ईश, कानों पर दिति और पर्जन्य तथा दोनों ही वाम- दक्षिण कन्धों पर अदिति और जयादिति का निवास कहा गया है। आपस्तथा च गलके आपवत्सो हृदि स्थितः । मरीचिः पृथ्वीधरश्च संस्थितौ स्तनयोर्द्वयोः ॥ 2 ॥ गले में आप और हृदय स्थान में आपवत्स तथा दोनों स्तनों पर मरीचि और पृथ्वीधर का निवास है। नाभिमध्ये स्थितो ब्रह्मा नाभिपृष्ठानुसंस्थितौ । सावित्री कुक्षिमध्ये तु रुद्रदासो द्वितीयके ॥ 3 ॥ नाभि के मध्य में ब्रह्मा और नाभि के पीठ पर सावित्री तथा काँखों के मध्य रुद्र और रुद्रदास का निवास है। इन्द्र इन्द्रजयश्चैव श्रोणीमध्ये तु संस्थितौ । अङ्गुष्ठाग्रे च पितरौ गुल्फे दौवारिको मृगः ॥ 4 ॥ इन्द्र और इन्द्रजय कुल्हों के मध्य में, अँगूठों के अग्रभाग में पितरगण और टखनों पर दौवारिक का निवास है। अन्तरिक्षः कूर्पराग्रे नागश्चैव द्वितीयके । वामे जानौ स्थितो रोगो दक्षिणे चाग्निदेवता ॥ 5 ॥ प्रपतद् भुवि ॥ भीतभीतैस्ततो देवैर्ब्रह्मणा चाथ शूलिना। दानवासुररक्षोभिरवष्टब्धं समन्ततः ॥ येन यत्रैव चाक्रान्तं स तत्रैवावसत् पुनः। निवासात् सर्वदेवानां वास्तुरित्यभिधीयते ॥ अवष्टब्धेन तेनापि विज्ञाताः सर्वदेवताः। प्रसीदध्वं सुराः सर्वे युष्माभिर्निश्चलीकृतः ॥ (मत्स्य. 252, 12-15)