भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

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. Wait, in line 5: it curves to the left, which is (u). So स्वयंभुक्त,. Wait, let's check मनुमन्दिरः ? ।: There is clearly a question mark ? before the danda . Yes, मनुमन्दिरः ? । * प्रभामणिश्च ह्लादश्च ह्यङ्गाष्टकमुदाहृतम् ॥ २१ ॥ * Wait, ह्लादश्च or ह्रादश्च? Look at ह्लाद: the conjunct is with attached below. In Devanagari, ह्ल has below . ह्र has a diagonal slash. Here it clearly has the shape below ! So it is ह्लादश्च. And ह्यङ्गाष्टकमुदाहृतम् ॥ २१ ॥. * स्वयंभुक्त, तलकीर्ण, शान्त, मनु, मन्दिर, प्रभा, मणि, ह्लाद— इनको अङ्गाष्टक * कहा गया है। * क्षराक्षरपदादीनां — * Wait, is it क्षराक्षरपदादीनां —?