अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
DevanagariHindipublished535 पृष्ठ
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अपि रदभङ्गखण्डने" -> वाम-प्य-र-द-भ-ङ्ग-ख-ण्ड-ने! वा (1) म (2) प्य (3) - वामप्य्! र (4) द (5) भ (6) ङ्ग (7) ख (8) ण्ड (9) ने (10) - wait, that's only 10! Wait, is the meter 11 syllables? What about: "क्षीरवृक्षफलपुष्पपादपेष्वापगातटविघट्टनेन वा।" क्षी-र-वृ-क्ष-फ-ल-पु-ष्प-पा-द-पे-ष्वा-प-गा-त-ट-वि-घट्-ट-ने-न वा Count: क्षी (1) र (2) वृ (3) क्ष (4) फ (5) ल (6) पु (7) ष्प (8) पा (9) द (10) पे (11) ष्वा (12) प (13) गा (14) त (15) ट (16) वि (17) घट् (18) ट (19) ने (20) न (21) वा (22) Wait! That's 22 syllables! That's NOT Trishtubh! 22 syllables in half a verse? That means