भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

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470 अपराजितपृच्छा वैश्य जाति के अश्वों का स्वर मधुर होता है। इसके विपरीत शूद्र जाति के अश्व का शब्द कर्कश होता है। जो अश्व किसी क्षण में शुद्धासन या आरोहण के समय स्वस्थ, शान्त रहे, संग्राम में भी सावधान किन्तु चञ्चल रहे परन्तु किसी क्षण में घोड़ियों की ओर आकर्षित होकर आतुर हो उठे एवं किसी क्षण पुनः स्वस्थ और शान्तचित्त होकर स्थिर रहे, ऐसे सभी अश्व शूद्र संज्ञक यानी चतुर्थ जाति के माने गए हैं। इत्युत्तमा मता अश्वाः शेषाः प्रकृतिजातकाः । इति ज्ञातिप्रभेदाः स्युः प्रमाणं सप्तधोत्तमम् ॥ 13 ॥ सुन्दरश्चाऽथ श्रीवत्स आह्लादश्च मनोहरः । विजयो विभवः शान्तः सप्ताऽश्वा उत्तमात्तमाः ॥ 14 ॥ उक्त वर्णित उत्तम अश्व माने गए हैं। अन्य शेष को सामान्य प्रकृतिजात अश्व समझें। ये सभी जातिभेद बताए, जिनके प्रमाण भी सात प्रकार के उत्तमोत्तम कहे गए हैं जो इस प्रकार है— (1.) सुन्दर, (2.) श्रीवत्स, (3.) आह्लाद, (4.) मनोहर, (5.) विजय, (6.) विभव और (7.) शान्त— ये सातों प्रकार के उत्तमोत्तम अश्व होते हैं। तथा चोच्छ्रयादीनां प्रमाणमाह — षष्ट्यङ्गुलः₆₀ सुन्दरः स्याच्छ्रीवत्सश्चतुःषष्टिभिः₆₄ । अष्टषष्टिभिराह्लादो₆₈ द्वासप्तत्या₇₂ मनोहरः ॥ 15 ॥ षट्सप्तत्या₇₆ च विजयो विभवोऽशीतिभिस्तथा₈₀ । चतुरशीतिभिः₈₄ शान्तः प्रमाणं सप्तधा₇ विदुः ॥ 16 ॥ अब इन घोड़ों के उक्त नामानुसार उनकी ऊँचाई आदि के प्रमाण कहते हैं। सामान्यतया (1) सुन्दर जाति का घोड़ा 60 अङ्गुल ऊँचा होता है, (2) श्रीवत्स जाति का घोड़ा 64 अङ्गुल, (3) आह्लाद जाति का घोड़ा 68 अङ्गुल, (4) मनोहर जाति का घोड़ा 72 अङ्गुल, (5) विजय जाति का घोड़ा 76 अङ्गुल, (6) विभव नाम की जाति का घोड़ा 80 अङ्गुल तथा (7) शान्त जाति का घोड़ा 84 अङ्गुल की ऊँचाई लिए होता है। इस प्रकार विद्वानों ने घोड़ों के सात प्रकार से प्रमाण कहे हैं। अशुभाश्वलक्षणमाह — ककुद्वान् कुम्भिकावांश्च कराली कृष्णतालुकः । हीनदन्तोऽधिकदन्तः षडश्वाः स्वामिघातकाः ॥ 17 ॥ अब अशुभ अश्वों की पहचान कहते हैं। जो घोड़े कूबड़ वाले, कुम्भ वाले,