भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

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सूत्र- १ ५ (इनके अतिरिक्त) हरित, उत्सङ्ग, नागेन्द्र, देवन्य, किंशुक, पद्मक, पार्श्वक, संपदङ्ग, ईक्षण, विश्वामित्र, जनक, व्यास, वाल्मीकि, मैत्रेय, धर्मक, प्रचेता, वैजयन्तक, शान्त, समुद्रक, वैशम्पायन, पाचक, जीवध्वन, बाल्यषष्टि, शम्भु, चर्णक, शुक, अत्रि, यमक, विशाला, ब्रह्मतेजस्, शान्त, विद्रुम, बहुधान्य, गव्य, गर्ग, लम्पट, ख्यात, नील, सत्य, मृगाक्ष, वृषचक्र, शङ्खवर्ण, लोमश, चन्द्रभानु, वज्रसूचि, किरात, सम्भ्रम, सुवर्ण, श्यामतुङ्ग, हेमकान्ति, देवल, शिखिध्वज, महाकान्ति, शिवात्मा, चन्द्रशेखर, जय, विजय, सिद्धार्थ, अपराजित व अठासी महाख्याता ब्रह्मतेजस् ऋषिगण, नीचा सिर और ऊपर पाँव करके सैकड़ों वर्षों तक शीर्षासन की तपस्या करते हुए, सभी ज्ञान ध्यान परायण महात्माओं को प्रसन्न किया और सन्तुष्ट किया। तत्र वनस्पतिवर्णनं — केचित्कन्दफलाहाराः पञ्चगव्योपजीविताः । केचिद् विस्तृतपथ्याश्च केचिन्नक्षत्रभोजनाः ॥ २७ ॥ इनमें से कोई तो कन्द और फलाहारी थे। कोई पञ्चगव्य पर जीवित थे। कोई बहुत ही पथ्यों को पालन करने वाले थे। कोई-कोई नक्षत्रानुसार भोजन करने वाले थे।¹ तत्र विश्वकर्मदिव्याश्रमवर्णनम् — इत्येते ऋषयः सर्वे पृष्ठे वै गन्धमादने। भूर्भुवः स्वर्भृतश्चैव वने दिव्यावतोत्तमे ॥ २८ ॥ ये सभी ऋषिगण गन्धमादन पर्वत के पृष्ठभाग में रहते थे। इनके द्वारा उच्चारित गायत्री मन्त्र जाप के भूः भुवः स्वः के उच्चारण से वन दिव्य और उत्तम हो रहे थे। अनेकधा वने तत्र चन्दनागुरुपादपाः । पुन्नागनागबकुला विविधा वृक्षजातयः ॥ २९ ॥ जातीचम्पकमन्दारा नीलरक्तोत्पलं तथा। कङ्कोलकलवङ्गादि कर्पूरोद्द्रुमपादपाः ॥ ३० ॥ अतीवफलसंयुक्ता लताभिर्विविधाः कृताः । रक्तचन्दनवृक्षाश्च प्रभूततृणपादपाः ॥ ३१ ॥ उक्त वन में अनेक प्रकार के चन्दन, अगरु के पेड़, पुन्नाग, नाग, बकुल आदि

  1. तुलनीय— केचित्पुष्पफलाहाराः शीर्णपर्णाशिनस्तथा ॥ केचिद्गोमयभक्षाश्च जलाहारास्तथा परे। साग्निहोत्राः सुविद्वांसो मोक्षमार्गार्थचिन्तकाः ॥ (स्कन्द. प्रभास. 22, 21-22)