अपरोक्षानुभूति (दीपिका व हिन्दी टीका सहित)
Aparokshanubhuti with Dipika & Hindi Commentary
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास / गीताप्रेस · खेमराज श्रीकृष्णदास / गीताप्रेस · 1940 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसंस्कृतटीका-भाषार्टीकासहिता । ( ६१ ) अतिसूक्ष्मकी तरह दीखै है तिसी प्रकार अज्ञानवशसे इस आत्मामें देहका ज्ञानहै ॥ ८० ॥ सूक्ष्मत्त्वेसर्वभावानां स्थूलत्वं चोपने- त्रतः ॥ तद्वदा० ॥ ८१ ॥ सं. टी. सूक्ष्मत्वेइति ॥ ८१ ॥ भा. टी. जिस प्रकार अतिसूक्ष्म वस्तुओंकाभी उपनेत्र अर्थात् दूरवीन आदिसे अतिस्थूल वस्तुकी तरह बोध होय है तिसी प्रकार अज्ञान वशसे इस आत्मामें देहका ज्ञानहै ॥८१॥ काचभूमौजलत्वंवा जलभूमौहिका चता ॥ तद्वदा० ॥ ८२ ॥ सं. टी. काचभूमाविति ॥ ८२ ॥ भा. टी. जिस प्रकार काँचकी भूमिमें जलकी बुद्धि होय है और जलकी भूमिमें काँचकी बुद्धि होयहै तिसी प्रकार अज्ञान वशसे आत्मामें देहज्ञान है ॥ ८२ ॥ यद्वदग्नौ मणित्वं हि मणौ वा वह्निता पुमान् ॥ तद्वदा० ॥ ८३ ॥ सं. टी. यद्वदिति ॥ ८३ ॥ भा. टी. जिस प्रकार भ्रमसे अग्निमें मणिकी बुद्धि होय है और मणिमें अग्निकी बुद्धि होय है तिसी प्रकार अज्ञान वशसे आत्मामें देहका ज्ञानहै ॥ ८३ ॥