भारतकोश
आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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-आर्यभटीये- ६५ क्रियंतेऽत्र तन्निमित्तं मध्ये मान्दार्थमपिच शैघ्रार्धम् । शैघ्रं मान्दं मान्दं शैघ्रम्वेति क्रमस्स्मृतोऽन्यत्र ॥ मान्दं कदयावृत्तं प्रथमं बुधशुक्रयोः कुमध्यं स्यात् । तत्केन्द्रान्मन्ददिशि मन्दान्त्यफलान्तरे तु मध्यं स्यात् ॥ मान्दप्रतिमण्डलस्य तस्मिन्न्यत्र स्थितो रविस्तत्र । प्रतिमण्डलस्य मध्यं शैघ्रस्य तस्य मानमपिच गदितम् ॥ शीघ्रस्ववृत्ततुल्यं तस्मिंश्चरतस्सदा ज्ञशुक्रौ च । स्फुटयुक्तिः प्राग्वत्स्याद्दूरभेदः पूर्ववद्भवैदिह च ॥ क्रियतेऽत्र तन्निमित्तं शैघ्रार्धं व्यत्ययेन सग्दीरुचे । तत्सिद्धं मान्दं प्राक् पश्चाच्छैघ्रञ्च सूरिभिः पूर्वैः ॥ . इति ॥ भूताराग्रहविवरानयनायाह । भा०:---शुक्र और बुध का तो मध्यम हीन शुक्नोच्च से उत्पन्न शीघ्रफल अर्द्धोन को स्वमन्दोच्च मेषादि में ऋण और तुलादि में धन करना चाहिये अर्थात् शीघ्रोच्च के नियम के उलटा इस प्रकार सिद्ध मन्दोच्च से जो मन्दफल उन सब के साथ संस्कृतशुक्र और बुध ( मध्यम ) स्फुट मध्य होते हैं । शीघ्र फलार्द्ध संस्कृत मन्दोच्च को मध्यम घटाकर उससे उत्पन्न मन्दफल सब के साथ संस्कृतमध्य स्फुट होता है। फलानयन प्रकार तो मन्दकेन्द्र भुजा की ज्या को मन्दस्फुट वृत्त के साथ गुणनकर ८० से भाग देवे, भागफल चापीय मन्दफल होगा। उसी प्रकार शीघ्रकेन्द्र भुजज्या को शीघ्रस्फुट वृत्त के साथ गुणनकर, गुणनफल में ८० का भाग देवे, भागफल शीघ्रफल होगा। कर्ण तो उस २ केन्द्र से उत्पन्न भुजज्या को एवं कोटीज्या को स्ववृत्त से गुणनकर ८० का भाग देवे भागलब्ध भुजाफल और कोटीफल होंगे । कोटीफल को सिंह ( राशि ) आदि में व्यासार्द्ध में मिलाकर, कर्कट ( राशि ) आदि में कोटीफल को व्यासार्द्ध से घटाकर, वर्गकर उसमें भुजावर्गफल को मिलाकर मूल करे तो कर्ण होगा। एवं एक बार करने ही से शीघ्रकर्ण स्फुट होता है। मन्दकर्ण तो विशेषित स्फुट होता है । उस प्रकार प्रथम सिद्धकर्ण को भुजा कोटी द्वारा गुणन कर व्यासार्द्ध में भाग देवे, भागफल भुजाफल, कोटीफल कर्ण सिद्ध होते हैं । पुनः उन दोनों से व्यासार्द्ध से पूर्ववत् कर्ण लावे। उस कर्ण को भी ८० द्वारा भाग देने पर लब्धि भुजाफल और कोटीफल ९ से गुणन कर व्यासार्द्ध से भाग देकर भुजाफल और कोटीफल को लाकर उनसे वर्ग मूल ९

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