भारतकोश
आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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भूमिका ११ 'तनकाल की विचित्र महिमा है! अनन्तकाल, अनादि-देव को ग्रास करने के लिये उद्यत है। अनादि, देव आज भारत में कलुषित भाव से पूजित होते हैं। अङ्गराग न होने से शीघ्र पूजा लोप होगी। भारत के विप्र कुल सदा- शय साधुचित्त यह रूपक कल्पना करके भी आज सनातन आर्यसमाज के निकट दायी हैं। हम जातीय ऋण विमोचनार्थ आज उस श्रीकृष्ण लीला के रहस्य भेद करने में कृत संकल्प हुए हैं। फाल्गुन की अमावास्या को सायङ्काल में पूर्व बार गोलक (आकाश की ओर) सन्दर्शन करो। तब देखोगे कि यह आज श्रीकृष्ण लीला गोलक में अनश्वर अक्षरों में अङ्कित हो रही है। उस समय अपने मस्तक की ओर (आकाश में) तारक मय धनुराकृति जो तारा देखते हो उसका नाम "पुनर्वसु" है। इस धनु नक्षत्र वा वसुदेव की गोद में * यह देवकी विरा- जमान है। इस वसु नक्षत्र के तृतीय मण्डल में जो विन्दु देखते हो उस बिन्दु का नाम 'कर्कट क्रान्ति' है। यह विन्दु उत्तरायण की चरम सीमा पर अ- वस्थित है। इस बिन्दु के स्पर्श करने पर सूर्य्यदेव की अयन गति शेष होती है। और इस पर नये वर्ष के "बालार्क" का उदय (जन्म) होता है। यह बिन्दु बाल (नये साल का सूर्य्य) बाल कृष्ण के जन्म (उदय) स्थान है। क- ल्पना नहीं समझो नव दुर्वादलश्याम (१) तुम्हारे सामने प्रत्यक्ष दर्शन हो रहा है। श्रीकृष्ण रेखा से विषमण्डल छायावत (२) ज्योतिश्चक्रवृत्त में वाल डिंडी-के सम्मुख में कर्कट सिंह कन्या तुला वृश्चिक और धनु राशि हैं। श्रीकृष्ण यमुना (३) अतिक्रमण कर प्रथमतः अग्रसर हुए। सम्मुख में कर्कट राज्यस्थ तीन ता- रात्मक वाण के आकार का पुष्य नक्षत्र पश्चिमोन्मुख विराजमान है। श्रीकृष्ण पुष्य संक्रमण से पीछे कर्कट राशिस्थ इदं सर्प कालिय (४) कालीय सर्प का मस्तक षट्तारकमय चक्राकृति और इसको आश्लेषा नक्षत्र कहते हैं। इस की अधिष्ठात्री देवता 'फणी' हैं। श्रीकृष्ण ने आश्लेषा में पर रखकर कालीय सर्प को दमन किया। सम्मुख

  • पुनर्वसु नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता देवमाता अदिति हैं उस कालिय, कालीदह। कन्हैया वसुदेवश्च ब्रह्मवै०पु० श्रीकृष्ण जन्मखण्डे । 'अदितिर्देवका ह्यभूत्, इति हरिवंशे। रेवती नक्षत्र से चित्रा नक्षत्र पर्यन्त कृष्ण रेखाका का नाम अदिति या देवकी मौमण्डल। (१) Castor star अर्थात् विष्णु नामक पुनर्वसु नक्षत्र के छः तारों में से सबसे ऊर्ध्ववर्ती तारा। जैसे, - "धर्मोध्रुवश्च, सोमश्च विष्णुरनिलोनलः प्रत्यूषश्च प्रभासश्च ।। अष्टौवसव इति क्रमात् स्मृता,," इति स्मृतः (२) Lynx Con- tellation or Canis minor (३) गरुड०पु० १० । १७ । १।(४) Hydra Constillation