आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३० आर्यभटीयम्- इत्यादि। अब इस का आगे "प्रथम आर्यभटीय" का अनुवाद आरम्भ होगा हमारे देशके बहुतसे अमूल्य ग्रन्थ तो अङ्गरेजों से पहिले के आये हुए विधर्मियों के उपद्रव आदि कारणों से नष्ट भए हुए, उन से बचे बचाये ग्रन्थ, देश के ईर्ष्यालु व मण्डूकों (मूर्खो) के पास सड़ते हैं और उनका प्रचार नहीं होता, इससे बचे बचाये ग्रन्थ हमारे परम माननीय अङ्गरेजी गवर्नमेण्ट के सुप्रबन्ध से पुस्त- कालयों तथा लन्दन, जर्मन आदि देशों में सुरक्षित हैं, परन्तु बड़े शोच की बात है कि जिस भारतवासियों के घर का रत्न समुद्र पार जाये, वे भड्डू के लड्डू की गाढ़ निद्रा में कुम्भकरण की नाईं खर्राट मार कर सोते हैं और जगाने पर भी नहीं जगते-और इन्हीं अमूल्य ग्रन्थों का तर्जुमा विला- यत आदि से होकर आता है तो जी की जी भाव में देखते हैं। हमने असम देश के श्रीरण रक्षार्थ डूंढिंराज के पुराने ग्रन्थ-आर्यभटीय की एक प्रति असम् देश से मंगवा कर पाठकों के अवलोकनार्थ सटीक सानुवाद प्रकाशित किया है। आशा है कि हमारे पाठकगण इस की एक २ प्रति मंगा कर अपने स्वदेशीय रत्नोंका संचय कर हमारे परिश्रम को सफल करेंगे अनुवादक.