आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५७ गीतिकापादः ॥ कहते हैं । सर्वधन को इष्टकाल से गुणा करे, पुनः इसको मूलधन से गुणा करे । मूल (१००) के आधे को (५०) वर्ग कर उस में जोड़े और इस का वर्गमूल निकाले और उस मूल को मूलधन के आधे से घटावे और शेष को इष्टकाल से भाग देवे । भागफल इष्टधन का ब्याज होगा । उदाहरण जैसेः—मूलफल सूदसहित १६ रु० ६ मास (इष्टकाल) से गुणा करने पर ९६ को मूलधन १०० से गुणा किया तो ९६०० हुआ । १०० का आधा ५०x५०=२५०० इसको ९६००+२५००=१२१०० इसका वर्गमूल ११० हुआ, इसमें मूलधन के आधे ५० को घ टाया तो ६० रहे, इसमें इष्टकाल ६ का भाग दिया तो १० मिला, यही एक मास में १०० का ब्याज हुआ ॥ २५ ॥ त्रैराशिकफ़लराशिं तमथेच्छाराशिना हतं कृत्वा । लब्धं प्रमाणभजितं तस्मादिच्छाफलमिदं स्यात् ॥ २६ ॥ प्रमाणं फलमिच्छा चेति त्रयो राशयस्स्युः । तैर्निष्पन्नं कर्म त्रैराशिकम् त्रैराशिके यः फलारूपो राशिस्तत्त्रैराशिकफलराशिमिच्छारूपराशिना हतं कृत्य प्रमाणाख्यराशिना भाजितं कार्यम् । एवं भाजितात्तस्माद्राशेर्यल्लब्धं तदिदमि च्छाफलं भवति । उदाहरणम् । ताम्बूलानां शतेनाम्रदशकं लभ्यते यदि । ताम्बूलषष्ट्या लभ्यन्ते कियन्त्याम्राणि तद्वद ॥ अत्र ताम्बूलशतं प्रमाणराशिः । आम्रदशकं फलराशिः । ताम्बूलषष्टिरि च्छाराशिः । तेन गुणिततत्फलात्प्रमाणा लब्धं षट्संख्यं भवति । तदिच्छाफलम् । भिन्नेषु राशिषु यो विशेषस्तमार्यार्धेनाह । पहिली राशि को "प्रमाणराशि", दूसरी को "फलराशि", और ती सरी को "इच्छाराशि" कहते हैं । फलराशि को इच्छाराशि से गुणा कर और प्रमाणराशि से भाग देवे तो भागफल इच्छाराशि (उत्तर) होगी उदाहरण जैसेः—१०० पान में तो, १० आम आते हैं तो ६० पान में कितने आम आवेंगे ? ६०x१०=६००, ६०० ÷ १००=६ आंम आयेंगे । यही इच्छा राशि हुई ॥ २६ ॥ छेदाः परस्परहता भवन्ति गुणकारभागहाराणाम् । गुणकारभागहाराणां छेदाः परस्परहतास्स्फुटा भवन्ति । एतदुक्तं भवति गुण्यगुण्ययोराहतिरत गुणकारशब्देन विवक्षिता । हार्य इत्यर्थः । हार्यस्यच्छेदे