भारतकोश
आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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६ -आर्य्यभटीयस्य- (ज्योतिष शास्त्र का अनुशीलन)। वेद विहित याग, यज्ञादि के समयादि नि- र्णय के लिये ज्योतिष शास्त्रामृत की प्राप्ति के लिये देव (प्रकाश) और असुर (अन्धकार) में मेल हुआ। दोनों पक्ष ने मिलकर आकाश मन्थन किया मन्दर पर्वत स्वरूप. 'क्रान्तिपात विन्दु' में सर्प की आकार वाली रेखा संयोजित हुयी, और क्रम से गोलार्द्ध रूपी दिन रात आविर्भूत और तिरोभूत हो, गोलक विलोडित और मथित हुआ क्रम से ज्योत्स्ना रूपिणी (चान्दनी) "लक्ष्मी" के साथ चन्द्रमा की स्थिति स्थान, राशि चक्र में निर्णीत हुई । और खगोल के बीच "सुरभि" (गौ) रूपिणी पृथिवी की अवस्थिति स्थान निराकृत हुई । "कौस्तुभ" रूप "ध्रुव" तारा विराट मूर्ति के हृदय में स्था- पित हुई । और ग्रह, नक्षत्रगण राशि चक्र के यथा स्थान में सन्निविष्ट हुये । और "सावन" काल यथोचित रूप से निर्णीत होने लगा । याग, यज्ञादि (तिथि आदि विचार पूर्वक) अनुष्ठित होने लगे। "धन्वन्तरि" रूप से कुम्भ राशि धनु राशि के ३० अंश अन्तर पर स्थापित हुआ । महर्षि पराशर ने विष्णु- पुराण के समुद्र मन्थन के उपसंहार में यों लिखा है कि:- "ततः प्रसन्नाभाः सूर्य्यः प्रययौ स्वेनवत्र्मना । ज्योतींषिंच यथामार्गं प्रययुर्मुनि्सत्तम ! ॥" १।६।११२॥ उपसंहार में वक्तव्य यह है कि, प्राचीन समय में सब जातियों में सूर्य्य स्वामी और चन्द्रमा पत्नी रूप से परिगणित होते थे और वेद में भी यह स्पष्टतया लिखा है:- "समिथुनंउत्पादयते रयीञ्चप्राणञ्च । एते मे वहुधा प्रजाः पश्यितः ॥" इतिप्र० उपनिषदि ॥४॥ अर्थ:-प्रजा सृष्टि कामना से ब्रह्मा ने चन्द्र, सूर्य्य को स्त्री पुरुष रूप से सृष्टि किये और सूर्य्य चन्द्र से मनु और मनु से मानव जाति सृष्टि हुई । फलित ज्योतिष के मत से यद्यपि चन्द्रमा स्त्री-ग्रह कह कर परिगणित है किन्तु चान्द्रमास गणनार्थ चन्द्र, नक्षत्र वा तारापति कह कर परिगणित होता चन्द्रमा का इसप्रकार स्त्री एवं पुरुष दोनों प्रकृति की रक्षा के लिये पौराणिक गण 'चन्द्रविम्ब' और चन्द्रमा की ज्योति को स्वतन्त्र करने में वाध्य हुए । समुद्र मन्थन से चन्द्रविम्ब का लक्ष्मी सहज नाम हुआ, जैसे:--- "दाक्षायणीपतिर्लक्ष्मी-सहजश्च सुधाकरः" । शब्दरत्नावली।