भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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अथ हारीतस्मृतिः

येवर्णाश्रमधर्मस्थास्तेभक्ताःकेशवं प्रति ।
इतिपूर्वंत्वयाप्रोक्तं भूर्भुवःस्वर्द्विजोत्तमाः ॥ १ ॥
वर्णानामाश्रमाणाञ्च धर्मान्नोब्रूहिसत्तम ।
येनसन्तुष्यतेदेवो नारसिंहःसनातनः ॥ २ ॥
अत्राहंकथयिष्यामि पुरावृत्तमनुत्तमम् ।
ऋषिभिःसहसंवादं हारीतस्यमहात्मनः ॥ ३ ॥
हारीतंसर्वधर्मज्ञमासीनमिवपावकम् ।
प्रणिपत्याऽब्रुवन्सर्वे मुनयोधर्मकाङ्क्षिणः ॥ ४ ॥
भगवन्सर्वधर्मज्ञ सर्वधर्मप्रवर्त्तक ।
वर्णानामाश्रमाणांच धर्मान्नोब्रूहिभार्गव ॥ ५ ॥
समासाद्योगशास्त्रंच विष्णुभक्तिकारंपरम् ।


भा०:–जो वर्ण तथा आश्रम के धर्ममें स्थित तीनों लोक के ब्राह्मण हैं वे केशव भ-
गवान् के भक्त होते हैं यह प्रथम तुमने कहा था– ॥ १ ॥ अब हे पुरुषों में
श्रेष्ठ जिस से सनातन नरसिंह देव प्रसन्न हों उन वर्ण आश्रम के धर्मों को क-
हो ॥ २ ॥ इस विषय में उत्तम पुरातन वृत्तान्त हम कहेंगे कि जो हारीत म-
हात्मा के संग ऋषियों का संवाद हुआ है ॥ ३ ॥ तपोबल से अग्नि के स-
मान तेजस्वी–बैठे हुए सब धर्मों के मर्म ज्ञाता–हारीत से धर्म के अभिलाषी
सम्पूर्ण मुनि नमस्कार करके बोले कि ॥ ४ ॥ हे भगवन् हे सब धर्मों के जानने
वाले–हे सब धर्मों के प्रवर्त्तक और हे भृगुवंश में उत्पन्न ! वर्ण और आश्रमों के
धर्मों को हम से कहिये ॥ ५ ॥ जो विष्णु भगवान् में उत्तम भक्ति प्रकट करने