अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 117, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें१२ भाषार्थसहिता ॥
स्नानंकार्यंततो नित्यं दन्तधावनपूर्वकम् ॥ ४ ॥
उषःकाले समुत्थाय कृतशौचोयथाविधि ।
मुखेपर्युषिते नित्यं भवत्यप्रयतो नरः ॥ ५ ॥
तस्माच्छुष्कमथार्द्रंवा भक्षयेद्दन्तकाष्ठकम् ।
करंजंखादिरंवापि कदंबंकुरवंतथा ॥ ६ ॥
सप्तपर्णंपृश्निपर्णी जंबूनिंबंतथैवच ।
अपामार्गंचबिल्वंचाकं चोदुम्बरमेवच ॥ ७ ॥
एतेप्रशस्ताःकथिता दंतधावनकर्म्मणि ।
दंतकाष्ठस्यभक्षश्च समासेनप्रकीर्तितः ॥ ८ ॥
सर्वैकंटकिनःपुण्याः क्षीरिणश्चयशस्विनः ।
अष्टांगुलेनमानेन दन्तकाष्ठमिहोच्यते ॥ ९ ॥
प्रादेशमात्रमथवा तेनदन्तान्विशोधयेत् ।
प्रतिपत्पर्वषष्ठीषु नवम्यांचैवसप्तमीः ॥ १० ॥
दन्तानांकाष्ठसंयोगो दहत्यासप्तमंकुलम् ॥
करे ॥ ४ ॥ अरुणोदय में उठके विधिपूर्वक शुद्धि मुखादिकी करे क्योंकि मुख के पर्युषित (बासी) होने से मनुष्य का मन मलिन अपवित्र होता है॥५॥ उन मे सूखी वा गीली दातौन अवश्य करे वह दातौन करंज, खैर, कदंब, मौलसिरी की हो ॥ ६ ॥ सप्तपर्ण, पृश्निपर्णी, जामन नीम औंधा बेल, आक गूलर-॥ ७ ॥ इतने वृक्ष दातौन के लिये उत्तम कहे हैं और दातौन करने का विचार भी संक्षेप से कह दिया है ॥ ८ ॥ कांटे वाले सब वृक्ष पवित्र और दूध वाले सब वृक्ष यश के हेतु हैं। आठ अंगुल लंबी दातौन होनी चाहिये अथवा प्रादेशमात्र ( बित्ताभर ) लम्बी हो उन से दांतों को शुद्ध करे । हेमहर्षि लोगो ! पड़वा, पर्व (अमावस आदि) छठ और नवमी तिथि को ॥ १० ॥ दातौन करने से सात पीढ़ी तक के पुरुषों को दग्ध करता है।