भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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हारीतस्मृतिः ॥ १५

स्नानार्थं मृदमानीय शुद्धाक्षततिलैःसह ॥२४॥
सुमनाश्चततोगच्छेन्नदींशुद्धजलाधिकाम् ।
नद्यान्तुविद्यमानायां नस्नायादन्यवारिणि ॥२५॥
नस्नायादल्पतोयेषु विद्यमानेबहूदके ।
सरिद्वरंनदीस्नानं प्रतिस्रोतस्थितश्चरेत् ॥२६॥
तडागादिषुतोयेषु स्नायाच्चतदभावतः ।
शुचिंदेशंसमभ्युक्ष्य स्थापयेत्सकलांबरम् ॥२७॥
मृत्तोयेनस्वकंदेहं लिम्पेत्प्रक्षालययत्नतः ।
स्नानादिकंचसंप्राप्य कुर्यादाचमनंबुधः ॥२८॥
सोऽन्तर्जलं प्रविश्याथ वाग्यतो नियमेनहि ।
हरिं संस्मृत्यमनसामज्जयेच्चोरुमज्जले ॥२९॥
ततस्तोरंसमासाद्य आचम्यापःसमन्त्रतः ।
प्रोक्षयेद्दारुणैर्मन्त्रैः पावमानीभिरेवच ॥३०॥
कुशाग्रकृततोयेन प्रोक्ष्यात्मानंप्रयत्नतः ।


शुद्ध अक्षत और तिलों सहित मट्टी को लाकर ॥२४॥ उदार चित्त होके शुद्ध अधिक, जल वाली नदी पर जावे। नदी के होते अन्य जल में स्नान न करे ॥२५॥ और अधिक जल वाले जलाशय के होते अल्प जल वाले में स्नान न करे। उत्तम नदी में स्रोत (प्रवाह) के सम्मुख खड़ा होकर स्नान करे ॥२६॥ और नदी के अभाव में तालाब आदि के जल में पूर्व वा उत्तराभिमुख खड़ा होके स्नान करे शुद्ध स्थान को जल से छिड़क कर सब वस्त्र रख दे ॥२७॥ पहिले शरीर पर जल छोड़ के सब देह में मुख से लेकर जल में घोर के मट्टी लगावे फिर स्नान करके आचमन करे। २८ ॥ फिर वह पुरुष जल के भीतर घुस के मौन होकर नियम से हरि भगवान् का स्मरण करके जंघा तक जल में गोता लगावे ॥२९॥ फिर किनारे पर आकर मन्त्रों पूर्वक जल का आचमन करके वरुण देवता के मन्त्रों तथा पावमानी सूक्त से शरीर का मार्जन कुश ले के करे ॥३०॥ कुश के अग्र भाग के जल से यत्न से देह का मार्जन करके (स्योना