अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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| अष्टादशस्मृतिसूचीपत्रम् ॥ | ९ | ||
|---|---|---|---|
| संख्या | विषयाः | स्मृतिनामानि | पृष्ठानि |
| १८४ | नित्यं नैमित्तिकं च प्रातरारभ्य क्रमेण कर्त्तव्यविचारः | ३ | |
| १८५ | प्रातःस्नानं पञ्चविधस्नानविचारश्च । | ” | ५ |
| १८६ | आचमनेन्द्रियस्पर्शसन्ध्योपासननित्यहोमदेवपूजाश्चेति दिवसस्याद्यभागकृत्यानि- | ” | ६ |
| १८७ | दिवसस्य द्वितीयभागे वेदाभ्यासः पञ्चविधः | ८ | |
| १८८ | पोष्यवर्गभरणपोषणविधिस्तृतीयभागकृत्यम् । | ९ | |
| १८९ | चतुर्थभागे वेदोक्तविधिना स्नानमध्याह्न सन्ध्योपासनोपस्थान तर्पणानि कर्त्तव्यानि | ” | १० |
| १९० | दिवसस्य पञ्चमभागे द्वादशनादावसरे पञ्चमहायज्ञविधानम् | ” | १२ |
| १९१ | षष्ठसप्तमभागयोरितिहासपुराणाद्यवलोकनम् । | १४ | |
| १९२ | अष्टमभागे ग्रामादितो बहिःशौचस्नानादिपुरस्सरं सायंसन्ध्योपासनं होमश्च - | ” | १४ |
| १९३ | निशायाः प्रदोषप्रहरे चतुर्थप्रहरे च सन्ध्योपासनादिरूपेण वेदाभ्यासो मध्ये यामद्वयं शयनम् | ” | १४ |
| १९४ | अमृतादिरूपाणां नवानां नवकानां विचारः । | ” | १५ |
| १९५ | दानधर्मविचारः । | ” | १८ |
| १९६ | धर्मपत्नीविचारः । | ” | २० |
| १९७ | शरीरशुद्धिविचारः | ” | २३ |
| १९८ | जननमरण सूतकशुद्धिविचारः । | ” | २५ |
| १९९ | योगाभ्यासतत्त्वज्ञानविषयः । | ” | २८ |
| २०० | ब्रह्मचर्याश्रमधर्माः | १६-गौतमस्मृतौ | १ |
| २०१ | ब्रह्मचारिणो नित्यनियमाः । | ” | ५ |
| २०२ | नैष्ठिकब्रह्मचारिकृत्यम् । | ” | ९ |
| २०३ | गृहस्थाश्रमे ब्राह्मादि विवाहलक्षणानि । | ” | ११ |
| २०४ | वर्णसंकराः । | ” | १२ |
| २०५ | पञ्चमहायज्ञानां विशेषेणातिथिपूजनव्याख्या । | ” | १३ |
| २०६ | अभ्युत्थानाभिवादनादिना मान्यानां सत्कारः। | ” | १६ |
| २०७ | आपत्काले वैश्यवृत्त्यादिजीविकाविचारः । | ” | १८ |
| २०८ | बहुश्रुतब्राह्मणलक्षणम् । | ” | २० |
| २०९ | अष्टाचत्वारिंशत्संस्काराणां व्याख्यानम् । | ” | २१ |