अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 140, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंऔशनसस्मृतिः ॥ ३
आयोगवेनविप्रायां जातास्ताम्रोपजीविनः ।
तस्यैवनृपकन्यायां जातःसूनिकउच्यते ॥ १४ ॥
सूनिकस्यनृपायांतु जाताउद्बंधकाःस्मृताः ।
निर्णेजयेयुर्वस्त्राणि अस्पृश्याश्चभवन्त्यतः ॥ १५ ॥
नृपायांवैश्यतश्चौर्यात् पुलिंदःपरिकीर्तितः ।
पशुवृत्तिर्भवेत्तस्य हन्युस्तान्दुष्टसत्त्वकान् ॥ १६ ॥
नृपायांशूद्रसंसर्गाज्जातः पुल्कसउच्यते ।
सुरावृत्तिंसमारुह्य मधुविक्रयकर्म्मणा ॥ १७ ॥
कृतकानांसुराणांच विक्रे तायाचको भवेत् ।
पुल्कसाद्वैश्यकन्यायां जातोरजकउच्यते ॥ १८ ॥
नृपायांशूद्रतश्चौर्याज्जातोरंजक उच्यते ।
ये वस्त्र वियनने और कांसे के व्यापार से जीविका करें तथा इन में जो वस्त्र पर रचे सूत रेशम आदि के कसीदे से जीते हैं वे शीलिन कहते हैं ॥ १३ ॥
आयोगव (कोरी) से जो ब्राह्मण की कन्या में उत्पन्न होते हैं वे ताम्रोपजीवी (तांबे आदि से जीविका करने वाले) होते हैं और आयोगव (कोरी) व क्षत्रिय कन्या में जो उत्पन्न हो उसे सूनिक (सोनी) कहते हैं ॥ १४ ॥
सूनिक से जो क्षत्रिय की कन्या में उत्पन्न हों उन्हें उद्बंधक कहते हैं ये वस्त्रों को धोवें और स्पर्श करने के योग्य नहीं होते ॥ १५ ॥
क्षत्रिय की कन्या में जो छिप कर व्यभिचार द्वारा वैश्य से पैदा हो उस को पुलिंद कहते हैं और ये दुष्ट जीवों को मार पशुवृत्ति (मांसवृत्ति) होते हैं ॥ १६ ॥
क्षत्रिय की कन्या में जो शूद्र से उत्पन्न हो उसे पुल्कश (कजाल) कहते हैं वह सुरा (मदिरा) की जीवका के निमित्त मधुर मीठा को बेचता है ॥ १७ ॥
और बनी हुई मदिरा को बेचता और पकाता भी है और पुल्कश से वैश्य की कन्या में जो पैदा हो उसे रजक कहते हैं ॥ १८ ॥
क्षत्रिय की कन्या में शूद्र से चोरी (व्यभिचार) से जो पैदा हो उसे रंजक (रंगरेज) कहते हैं तथा रंजक से जो वैश्य की कन्या में पैदा हो उसे शतंक (नट) वा गायक