भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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यमस्मृतिः ॥

गोमूत्रयावकाहारो मासार्द्धेनविशुद्ध्यति ॥ २६ ॥
गोब्राह्मणगृहंदग्ध्वा मृतंचोद्वन्धनादिना ।
पाशंछित्त्वावथातस्य कृच्छ्रमेकंचरेद्विजः ॥ २७ ॥
चांडालपुल्कसानांच भुक्त्वागत्वाचयोषितम् ।
कृच्छ्राब्दमाचरेज्ज्ञाना-दज्ञानाद्दैवद्वयम् ॥ २८ ॥
कपालिकान्नभोक्तॄणां तन्नारीगामिनांतथा ।
कृच्छ्राब्दमाचरेज्ज्ञाना-दज्ञानाद्दैवद्वयम् ॥ २९ ॥
अगम्यागमनेविप्रोमद्यगोमांसभक्षणे ।
तप्तकृच्छ्रपरिक्षिप्तो मौर्वीहोमेनशुद्ध्यति ॥ ३० ॥
महापातककर्त्तार-श्चत्वारोथविशेषतः ।
अग्निंप्रविश्यशुद्ध्यंति स्थित्वावामहतिक्रतौ ॥ ३१ ॥
रहस्यकरणेष्वेवं मासमभ्यस्यपूरुषः ।


चाण्डाल के अन्न को ब्राह्मण खालेतो गोमूत्र और जौ को खाने से पंद्रह दिन में शुद्ध होता है ॥ २६ ॥ गोशाला और ब्राह्मण के घर को जो जला दे तथा फांसी लगाकर जो मरा हो उस को जो जलावे अथवा उसकी फांसी का छेदन करे तो वह द्विज एक कृच्छ्रव्रत करै ॥ २७ ॥ चांडाल वा पुल्कस ( चंडालका भेद ) के यहां जानकर भोजन करले अथवा इन की स्त्रियों का संग करे तो एक वर्ष तक कृच्छ्र व्रत करे और अज्ञान से भोजन करै तो दो चान्द्रायण व्रत करे ॥ २८ ॥ ज्ञान से कापालिकों का अन्न खाले अथवा उनकी स्त्रियों को भोगे तो एक वर्ष तक कृच्छ्र करे औ अज्ञान से दो चान्द्रायणव्रत करै ॥ २९ ॥ भगिनी आदि अगम्या स्त्री के संग गमन करने और मदिरा तथा गो मांस के खाने पर तप्तकृच्छ्र करके मौर्वी ( सूत्र ) के होम से ब्राह्मण शुद्ध होता है ॥ ३० ॥ ब्रह्महत्यादि चारों महापातक करने वाले विशेष कर तो अग्नि में प्रवेश करके अथवा बड़े यज्ञ ( अश्वमेध आदि ) करके शुद्ध होते हैं ॥ ३१ ॥ छिप कर भी इस प्रकार का महापात को पुरुष अघमर्षण सूक्त का एक मास