अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 180, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंआपस्तम्बस्मृतिः ॥
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सर्वंशुद्ध्यतितोयेन तोयमर्केणशुद्ध्यति ॥ ६ ॥
सूर्यरश्मिनिपातेन मारुतस्पर्शनेनच ।
गवाम्मूत्रपुरीषेण तत्तोयन्तेनशुद्ध्यति ॥ ७ ॥
अस्थिचर्मादियुक्तं त खरश्वानोपदूषितम् ।
उद्धरेदुदकंसर्वं शोधनंपरिमार्जनम् ॥ ८ ॥
कूपोमूत्रपुरीषेण यवनेनापिदूषितः ।
श्वशृगालखरोष्ट्रैश्च क्रव्यादैश्चजुगुप्सितः ॥ ९ ॥
उद्धृत्यैवचत्ततोयं सप्तपिंडान्समुद्धरेत् ।
पंचगव्यंमृदापूतं कूपेतच्छोधनंस्मृतम् ॥ १० ॥
वापीकूपतडागानां दूषितानांचशोधनम् ।
कुंभानांशतमुद्धृत्य पंचगव्यंततःक्षिपेत् ॥ ११ ॥
यच्चकूपादपिबेत्तोयं ब्राह्मणःशवदूषितात् ।
कथंतत्रविशुद्धिःस्या-दितिमेसंशयोभवेत् ॥ १२ ॥
अक्लिन्नेनचाभिन्नेन केवलंशवदूषिते ।
से शुद्ध होते हैं और वह जल किससे शुद्ध होता है ॥ ६ ॥ सूर्य की किरणों के पड़ने से और पवन के लगने से तथा गौओं के मूत्र और गोबर से वह जल शुद्ध होता है ॥ ७ ॥ जिस जलके पात्रमें हाड-वा चाम पड़ा हो अथवा गधा कुत्ता इनसे अपवित्र हो उस कूपादि के सब जल को निकाल कर उस को अच्छे प्रकार साफ करे ॥ ८ ॥ मूत्र-विष्ठा इनके पड़ने से और यवन के जल भरने से-कुत्ता, गीदड़ गधा ऊंट और मांस के खाने वालों से कूप भी दूषित (अशुद्ध) होजाता है ॥ ९ ॥ उस कूपके जलको निकाल कर सात मिट्टीके पिंड (ढले) कूपमें से निकाले और पञ्चगव्य तथा पवित्र मिट्टी उसमें डालदे यह कुएका शोधन कहा है ॥ १० ॥ बावड़ी-कूप-तालाब ये यदि अपवित्र होजांयं तो सौ १०० घड़ा जल निकाल कर पंचगव्य डालदे ॥ ११ ॥ जो ब्राह्मण शव (मुर्दा) से अशुद्ध कुए के जलको पीले तब शुद्धि कैसे हो यदि यह संदेह मुझे होय तो ॥ १२ ॥ जो मुर्दा (रुधिर से भीगा नहीं) जिसका कोई