भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 216, कुल 805 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 216

संवर्त्तस्मृतिः ॥ ११

दशवर्षाभवेत्कन्या अतऊर्ध्वंरजस्वला ॥ ६६ ॥
माताचैवपिताचैव ज्येष्ठोभ्रातातथैवच ।
त्रयस्तेनरकंयान्ति दृष्ट्वाकन्यांरजस्वलाम् ॥६७॥
तस्माद्विवाहयेत्कन्यां यावन्नर्त्तुमतीभवेत् ।
विवाहोह्यष्टवर्षायाः कन्यायास्तुप्रशस्यते ॥ ६८ ॥
तैलामलकदाताच स्नानाभ्यंगप्रदायकः ।
नरःप्रहृष्टश्चासीत सुभगश्चोपजायते ॥ ६९ ॥
अनड्वाहौतुयोदद्याद् द्विजेसीरेणसंयुतौ ।
अलंकृत्ययथाशक्त्या धूर्वहौशुभलक्षणौ ॥ ७० ॥
सर्वपापविशुद्धात्मा सर्वकामसमन्वितः ।
वर्षाणिवसतेस्वर्गे रोमसंख्याप्रमाणतः ॥ ७१ ॥
धेनुंचयोद्विजेदद्याद् लंकृत्यपयस्विनीम् ।
कांस्यवस्त्रादिभिर्युक्तां स्वर्गलोकेमहीयते ॥ ७२ ॥
भूमिसस्यवतीं श्रेष्ठां ब्राह्मणेवेदपारगे ।


को रोहिणी दश वर्ष की कन्या और इस के पश्चात् रजस्वला होती है ॥ ६६ ॥
माता पिता और जेठा भाई ये तीनों रजस्वला कन्या को देखकर नरक में जाते हैं ॥ ६७ ॥ इस लिये जब तक रजस्वला न हो तब तक ही कन्या का विवाह करदे और आठ वर्ष की कन्या का विवाह श्रेष्ठ कहा है ॥ ६८ ॥ तेल आंवले स्नान का जल और उबटना इन को जो देता है वह मनुष्य सदा आनंद में मग्न रहता है और भाग्यवान् होता है ॥ ६९ ॥ जो पुरुष जोतने के योग्य अच्छे लक्षण वाले दो बैल यथाशक्ति सजाकर इलमंडित ब्राह्मण को देता है ॥ ७० ॥ सब पापों से शुद्ध होकर सर्व कामना सहित वह पुरुष उतने वर्ष तक स्वर्ग में बसता है जितने रोम बैलों के देहपर हों ॥ ७१ ॥ जो दूध देती तथा कांसे का पात्र (लोटा) और वस्त्र सहित गौ को भूषित (सजा करके) ब्राह्मण को देता है वह स्वर्गलोक में महत्व को प्राप्त होता है ॥ ७२ ॥ अन्न जिस में खड़ा हो ऐसी श्रेष्ठ पृथ्वी और आधी