भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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पृष्ठ 254

कात्यायनस्मृतिः ॥ १४

धनवृद्धिप्रसक्तांश्च कामतःकारिणस्तथा । कुलटोन्मत्तचोरांश्च परिविन्दन्नदुष्यति ॥ ६ ॥ धनवार्द्धुषिकंराजसेवकंकर्म्मकस्तथा । प्रोषितञ्चप्रतीक्षेत वर्षत्रयमपित्वरन् ॥ ७ ॥ प्रोषितंयद्यशृण्वानस्तदूर्ध्वंसमाचरेत् । आगतेनुपुनस्तस्मिन्पादेतच्छुद्धयर्थमाचरेत् ॥ ८ ॥ लक्षणंप्राग्गतायास्तु प्रमाणंद्वादशाङ्गुलम् । तन्मूललग्नायोदीची तस्याप्येतद्द्वयोत्तरम् ॥ ९ ॥ उदग्गतायाःसंलग्नाः शेषाःप्रादेशमात्रिकाः । सप्तसप्ताङ्गुलांस्त्यक्त्वा कुशेनैवसमुल्लिखेत् ॥१०॥ मानक्रियायामुक्तायामनुक्तेमानकर्त्तरि ।


धन के बढ़ाने में आसक्त हो वा अपनी इच्छा के अनुसार जो कर्म करता हो वा घर २ में जो फिरे वा उन्मत्त वा चोर इतने जेठे भाइयों से पहिले विवाह करने वा अग्निहोत्र लेने में छोटा भाई दोषभागी नहीं होता ॥ ६ ॥ यदिवड़ा भाई व्याज में धन को बढ़ाने वाला हो वा राजा का सेवक हो वा परदेश में हो ऐसे को जीवना करने वाला भी अग्निहोत्रादि कर्म करना चाहता हुआ छोटा भाई तीन वर्ष तक उस बड़े भाई की बाट देखे ॥ ७ ॥ यदि परदेश में रहने की खबर न हो कि कहां है तो एक वर्ष पीछे विवाह आदि करले यदि जेठा भाई फिर आजाय तो उस पाप की शुद्धि के के लिये चोथाई प्रायश्चित्त करे ॥ ८ ॥ अग्निकुण्ड बनाने के लिये जो चिह्न किया हो उस में जो रेखा पूर्व को खींचे वह बारह अंगुल की हो और उस रेखा के मूल से लगी उत्तर की रेखा दश अंगुल की खींचे ॥ ९ ॥ उत्तर को गई रेखा से मिली हुई शेष रेखा प्रादेश मात्र दश २ अंगुल की हों । उन को सात २ अंगुल छोड़ कर शेष भाग में उल्लेखन संस्कार कुशों से करे ॥ १० ॥ जहां माप करना तो कहा हो पर माप का करने वाला न कहा हो वहां विद्वानों