भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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भाषाऽर्थसहिता ॥
४९

कुर्यात्पिण्डत्रयंयस्य संस्थितःप्रपितामहः ॥ १४ ॥
जीवन्तमतिदद्याद्वा प्रेतायान्नोदकेद्विजः ।
पितुःपितृभ्योवादद्यात् सपितेत्यपराश्रुतिः ॥ १५ ॥
पितामहःपितुःपश्चात्पञ्चत्वंयदिगच्छति ।
पौत्रेणैकादशाहादिकर्तव्यंश्राद्धषोडशम् ॥ १६ ॥
नैतत्पौत्रेणकर्तव्यं पुत्रवांश्चेत्पितामहः ।
पितुःसपिण्डनंकृत्वा कुर्यान्मासानुमासिकम् ॥ १७ ॥
असंस्कृतौनसंस्कार्यौ पूर्वौपौत्रप्रपौत्रकैः ।
पितरंतत्रसंस्कुर्यादितिकात्यायनोऽब्रवीत् ॥ १८ ॥
पापिष्ठमपिशुद्धेन शुद्धं पापकृतापिवा ।
पितामहेनपितरंसंस्कुर्यादितिनिश्चयः ॥ १९ ॥
ब्राह्मणादिहतेताते पतितेसंगवर्जिते ।
व्युत्क्रमाच्चमृतेदेयं येभ्यएवददात्यसौ ॥ २० ॥
मातुःसपिण्डीकरणं पितामह्यासहोदितम् ।


पितामह और अपना पिता इन के लिये तीन पिण्ड वह पुरुष करे ॥ १४ ॥
(जीवते हुए का उलंघन करके मरे हुए को भी द्विज अन्न और जल देवे अथवा जिस का पिता जीवित हो वह अपने पिता के पितरों को देवे यह दूसरी श्रुति है)॥ १५ ॥
यदि पिता से पीछे पितामह मरे तो पोता एकादश आदि सोलह श्राद्ध करै ॥१६॥
यदि पितामह के कोई अन्य पुत्र होय तो पोता श्राद्ध न करै किन्तु पुत्र पिता की सपिंडी करके महीने २ में मासिक श्राद्ध करै ॥ १७ ॥
पितामह आदि यदि संस्कार हीन होंय तो पोते वा प्रपोते उनका संस्कार (दाह आदि) न करें यदि पिता संस्कार हीन होय तो उसका संस्कार पुत्र करै यह कात्यायन ऋषि ने कहा है ॥ १८ ॥
और यह निश्चय है कि पापी भी शुद्ध के संग शुद्ध हो जाता है पापी भी पितामह के संग पिता का संस्कार (श्राद्ध आदि) पुत्र करै ॥ १९ ॥
यदि पिता ब्राह्मण आदि से मरा हो वा पतित हो वा सत्संग से हीन हो अथवा फांसी से मरा हो तो भी उसे और जिनको यह देता है सब को पिण्ड देवे ॥ २० ॥
माता की सपिंडी दादी के