अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 292, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ५१
अग्निश्चतोषिताऽमुत्र साध्वीसौभाग्यमाप्नुयात्॥७॥ विनयावनतापिस्त्री भर्तुर्यादुर्भागाभवेत्। अमुत्रोमाग्निभर्तॄणामवज्ञात्तिकृतातया॥८॥ श्रोत्रियंसुभगांगांच अग्निमग्निचितिन्तथा । प्रातरुत्थाययःपश्येदापद्भ्यःसप्रमुच्यते ॥ ९ ॥ पापिष्ठंदुर्भागामन्त्यं नग्नमुत्कृत्तनासिकम् । प्रातरुत्थाययःपश्येतत्सकलेरुपयुज्यते ॥ १० ॥ पतिमुल्लङ्घ्यमोहात्स्त्री किंकिन्ननरकंव्रजेत् । कृच्छ्रान्मन्मनुष्यतांप्राप्य किंकिंदुःखंनविन्दति ॥११॥ पतिशुश्रूषयैवस्त्री कान्नलोकान्समश्नुते । दिवःपुनरिहायाता सुखानाम्पम्बुधिर्भवेत् ॥१२॥ सदारोऽन्यान्पुनर्दारान् कस्यचित्कारणान्तरात्। यइच्छेद्दिग्निमान्कर्तुं क्वहोमोऽस्यविधीयते ॥१३॥ स्वेग्नावेवभवेद्धोमो लौकिकेनाकदाचन ।
करने वाली पर प्रसन्न होता है कि जैसे पार्वती जी ने शिव जी को प्रसन्न किया है। जिसने अग्नि को प्रसन्न किया है वह स्त्री परलोक में सौभाग्य को प्राप्त होती है ॥७॥ पति में प्रेम से नम्रनी हुई भी स्त्री जो दुर्भागिन हो जिस के पुत्रादि नहीं उस ने पूर्व जन्म में पार्वती, अग्नि, और पति, इन का तिरस्कार किया जानो ॥८॥ वेदपाठी, सुहागिन स्त्री, गौ, अग्निहोत्र, और अग्निचयन यज्ञ इन को प्रातःकाल उठ कर जो देखे वह विपत्तियों से छूट जाता है ॥९॥ पापशील, दुर्भागिन बंध्या वा (विधवा) चमार भंगी आदि अन्त्यज नंगा, नकटा, इन को जो प्रातःकाल उठकर देखता है वह कलियुग को प्राप्त होता है ॥१०॥ अज्ञान से पति का उल्लंघन करके स्त्री किस २ नरक में नहीं जाती? फिर बड़े कष्ट से मनुष्य योनि को प्राप्त होकर किस २ दुःख को नहीं प्राप्त होती है ? ॥ ११ ॥ और पति की सेवा से स्त्री कौन २ लोक ( स्वर्गादि ) के सुख नहीं भोगती अर्थात् सभी लोकों के सुख पाती है और स्वर्ग से फिर भूलोक में आकर सुखों का समुद्र बनती है ॥ १२ ॥ जो एक स्त्री वाला अग्निहोत्री पुरुष किसी कारण से अन्य स्त्री से विवाह करने की इच्छा करे तो इस का होम किस अग्नि में होवे ? यह शंका है ॥ १३ ॥ समाधान यह है कि अपने अग्नि में ही होम
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