अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 323, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें४ | बृहस्पतिस्मृतिः ॥
गयांयास्यतियःपुत्रः सनस्त्राताभविष्यति ॥ २० ॥
एष्टव्याबहवःपुत्रा यद्येकोपिगयांब्रजेत् ।
यजेतवाश्वमेधेन नीलंवावृषमुत्सृजेत् ॥ २१ ॥
लोहितोयस्तुवर्णेन पुच्छाग्रे यस्तुपाण्डुरः ।
श्वेतःखुरविषाणाभ्यां सनीलोवृषउच्यते ॥ २२ ॥
नीलःपाण्डुरलाङ्गूलस्तृणमुद्धरतेतुयः ।
षष्टिवर्षसहस्राणि पितरस्तेनतर्पिताः ॥ २३ ॥
यस्यशृङ्गगतंपङ्कं कूलात्तिष्ठतिचोद्धृतम् ।
पितरस्तस्यचाश्नन्ति सोमलोकंमहाद्युतिम् ॥ २४ ॥
पृथोर्यदोर्दिलीपस्य नृगस्यनहुषस्यच ।
अन्येषांचनरेन्द्राणां पुनरन्योभविष्यति ॥ २५ ॥
बहुभिर्वसुधादत्ता राजभिःसगरादिभिः ।
यस्ययस्ययदाभूमिस्तस्यतस्यतथाफलम् ॥ २६ ॥
यस्तु ब्रह्मघ्नःस्त्रीघ्नोवा यस्तुवैपितृघातकः ।
वही हमारी रक्षा करने वाला होगा ॥ २० ॥ मनुष्य बहुत से पुत्रों की इच्छा करे यदि उन में से एक भी गया को जाय व अश्वमेध यज्ञ करे वा नील बैल का वृषोत्सर्ग करे ॥२१॥ नील बैल उस को कहते हैं जिस का रंग लाल हो, जो पूंछ के अग्रभाग में पीला हो और खुर तथा सींग जिस के सफेद हों ॥२२॥ नील जिसका रंग हो, पीली जिस की पूंछ हो और जो घास तृणों को उखाड़ २ के चरे, ऐसे बैल के उत्सर्ग से साठ हजार वर्ष तक पितर तृप्त होते हैं ॥ २३ ॥ नदी आदि के किनारे से उखाड़ा हुआ पंक ( कीचड़ ) जिस के सींग पर लगा हो ऐसे बैल के उत्सर्ग कर्त्ता के पितर प्रकाशमान चन्द्रमा के लोक को भोगते हैं ॥ २४ ॥ राजा पृथु, यदु, दिलीप, नृग, नहुष, और अन्य राजाओं में से कोई राजा वह वृषोत्सर्ग करने वाला मेरे पीछे फिर होता है ॥ २५ ॥ बहुत से सगर आदि राजाओं ने पृथिवी का दान किया जिस २ की जैसी २ पृथिवी दान हुई उस २ को वैसा २ ही फल हुआ ॥ २६ ॥ जो पुरुष ब्रह्म हत्यारा वा स्त्री को मारने वाला और पितृ घातक है वह पापी