भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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२ पाराशरस्मृतिः ॥

नदीप्रस्रवणोपेतं पुण्यतीर्थोपशोभितम् ॥ ६ ॥
मृगपक्षिनिनादाढ्यं देवतायतनावृतम् ।
यक्षगन्धर्वसिद्धैश्च नृत्यगीतैरलंस्कृतम् ॥ ७ ॥
तस्मिन्नृषिसभामध्ये शक्तिपुत्रंपराशरम् ।
सुखासीनंमहातेजामुनिमुख्यगणावृतम् ॥ ८ ॥
कृताञ्जलिपुटोभूत्वा व्यासस्तुऋषिभिःसह ।
प्रदक्षिणाभिवादैश्च स्तुतिभिःसमपूजयत् ॥ ९ ॥
अथसन्तुष्टहृदयः पराशरमहामुनिः ।
आहसुस्वागतंब्रूहीत्यासीनोमुनिपुंगवः ॥ १० ॥
व्यासःसुस्वागतंयेच ऋषयश्चसमन्ततः ।
कुशलंसम्यगित्युक्त्वा व्यासःपृच्छत्यनन्तरम् ॥
यदिजानासिमेभक्तिं स्नेहाद्वाभक्तवत्सल ! ॥ ११ ॥
धर्मंकथयमेतात ! अनुग्राह्योह्यहंतव ।
श्रुतामेमानवाधर्मा वासिष्ठाःकाश्यपास्तथा ॥ १२ ॥
गार्गीयागौतमीयाश्च तथाचौशनसाःस्मृताः ॥


के युक्त, फल फूलों के शोभायमान नदियों तथा झरनों से युक्त, पवित्र तीर्थों से जिस की शोभा है ॥ ६ ॥ मृग तथा पक्षियों के सुहावने शब्दों से युक्त, जिस में देवालय विद्यमान हैं, और जो यक्ष, गन्धर्व, सिद्ध, तथा अप्सरादि के नृत्य और गीतों से शोभा है ॥ ७ ॥ ऐसे बदरिकाश्रम में ऋषियों की सभा के बीच सुखपूर्वक बैठे तथा बड़े २ नामी अनेक मुनीश्वर जिन के चारों ओर बैठे हैं ऐसे शक्ति के पुत्र पाराशर का ॥८॥ ऋषियों सहित बड़े तेजस्वी व्यास जी ने हाथ जोड़ कर परिक्रमा अभिवादन और स्तुतियों से पूजन किया॥९॥ इस के अनन्तर मन से संतुष्ट हुए मुनियों में उत्तम पराशर महामुनि व्यास जी से बोले कि तुम भली प्रकार स्वागत ( आनन्द से आना ) कहो ॥ १० ॥ तब व्यास जी तथा अन्य ऋषियों ने कुशल पूर्वक आना कह कर पीछे व्यास जी ने यह पूछा कि हे भक्तवत्सल ! जो आप मेरी भक्ति को जानते हो कृपा से वा स्नेह से ॥ ११ ॥ हे पितः मुझ से धर्म कहिये क्योंकि मैं आप के अनुग्रह करने योग्य हूं—मैंने मनु, वशिष्ठ, कश्यप, ॥ १२ ॥ गर्ग, गौतम, उशना,

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