अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 334, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसंहिता ॥ ३
अत्रेर्विष्णोश्चसांवर्ता दाक्षादाङ्गिरसास्तथा ॥ १३ ॥ शातातपाञ्चहारीता याज्ञवल्क्यकृताश्चये । आपस्तम्बकृताधर्माः शंखस्यलिखितस्यच ॥ १४ ॥ कात्यायनकृताश्चैव तथाप्राचेतसान्मुनेः । श्रुताह्येतेभवत्प्रोक्ताः श्रौतार्थामेनविस्मृताः ॥ १५ ॥ अस्मिन्मन्वन्तरेधर्माः कृतत्रेतादिकेयुगे । सर्वेधर्माःकृतेजाताः सर्वेनष्टाःकलौयुगे ॥ १६ ॥ चातुर्वर्ण्यसमाचारं किंचित्साधारणंवद । चतुर्णामपिवर्णानां कर्त्तव्यंधर्मकोविदैः ॥ १७ ॥ ब्रूहिधर्मस्वरूपज्ञ सूक्ष्मंस्थूलञ्चविस्तरात् । व्यासवाक्यावसानेतु मुनिमुख्यःपराशरः ॥ १८ ॥ धर्मस्यनिर्णयंप्राह सूक्ष्मंस्थूलञ्चविस्तरात् । शृणुपुत्रप्रवक्ष्यामि शृण्वन्तुमुनयस्तथा । कल्पेकल्पे क्षयोत्पत्तौ ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः ॥ २० ॥ श्रुतिस्मृतिसदाचार निर्णेतारश्चसर्वदा ।
अत्रि, विष्णु, संवर्त, दक्ष, अंगिरा, ॥ १३ ॥ शातातप, हारीत, याज्ञवल्क्य, आपस्तम्ब, शंख, लिखित, ॥ १४ ॥ कात्यायन प्रचेता इन सब ऋषि मुनियों के कहे बनाये धर्मशास्त्र मैंने सुने हैं तथा आप के कहे वेद के अर्थ भी हम ने सुने और उन को हम भूले भी नहीं हैं ॥ १५ ॥ इस मन्वन्तर तथा कृत त्रेता आदि युगों में जो धर्म किये गये थे वे सब कलियुग में नष्ट हो गये ॥ १६ ॥ धर्म का मर्म जानने वालों को जो चारो वर्णों को कर्त्तव्य है वह चारों वर्णों का किंचित्साधारण आचार कहिये ॥ १७ ॥ हे धर्म के स्वरूप को जानने वाले ! सूक्ष्म और स्थूल आचार को विस्तार से कहिये । इस प्रकार व्यास जी के वचनों के पूर्ण होने पर मुनियों में मुख्य पराशर जी ने ॥ १८ ॥ सूक्ष्म और स्थूल धर्म का निर्णय विस्तार से कहा ॥ १९ ॥ हे पुत्र ! व्यास जी तथा अन्य मुनियो ! तुम सुनो कल्प २ में प्रलय तथा सृष्टि होने पर ब्रह्मा विष्णु और शिव ये तीनों ॥ २० ॥ श्रुति, स्मृति, और सदाचार के निर्णय करने वाले