भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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१२ पराशरस्मृतिः ॥

क्षुधितंतृषितंश्रान्तं बलीवर्दंनयोजयेत् । हीनाङ्गंव्याधितंक्लीबं वृषंविप्रोनवाहयेत् ॥३॥ स्थिराङ्गंनीरुजंदृप्तं सुनर्दंषण्ढवर्जितम् । वाहयेद्दिवसस्यार्द्धं पश्चात्स्नानंसमाचरेत् ॥४॥ जपंदेवार्चनंहोमं स्वाध्यायंसाङ्गमभ्यसेत् । एकद्वित्रिचतुर्विप्रान् भोजयेत्स्नातकान्द्विजः ॥५॥ स्वयंकृष्टेनचाक्षेत्रेधान्यैश्चस्वयमर्जितैः । निर्वपेत्पञ्चयज्ञांश्च क्रतुदीक्षांचकारयेत् ॥६॥ तिलां रसान्नविक्रेया विक्रेयाधान्यतत्ससाः । विप्रस्यैवंविधावृत्तिस्तृणकाष्ठादिविक्रयः ॥७॥ ब्राह्मणस्तुकृषिंकृत्वामहादोषमवाप्नुयात् । अष्टागवंधर्म्यहलं षड्गवंवृत्तिलक्षणम् ॥८॥ चतुर्गवंनृशंसानां द्विगवंगोजिघांसिनाम् । द्विगवंवाहयेत्पादं मध्यान्हंतुचतुर्गवम् ॥६॥


ऐसे बैल को न जुतवावे जो भूखा प्यासा थका किसी अंग से हीन रोगी-और नपुंसक हो ॥३॥ जो स्थिरांग (जिस के अंग सब पुष्ट हों) रोग रहित-दृप्त खूब शब्द करता हो-जो बधिया न किया गया हो-ऐसे बैल को आधे दिन जुतवावे और पीछे स्नान करे ॥४॥ जप देवताओं की पूजा होम और छः अङ्गों सहित वेद का पाठ इन का अभ्यास करे और एक, दो, तीन, वा चार ब्राह्मणों (जो ब्रह्मचर्य समाप्त करके गृहाश्रम में आये हों उन्हें) को भोजन करावे ॥५॥ आप जोते खेत में और आप ही पैदा किये अन्नों से पंच यज्ञ करे और यज्ञ की दीक्षा भी करावे ॥६॥ तिल तथा छः रसों को न बेंचे। अन्न और जो अन्न के समान हैं उन को, और तृण, काठ आदि को बेचे। ब्राह्मण की यह जीविका वैश्यवृत्तियों में है ॥७॥ जो ब्राह्मण खेती करे तो महादोष को प्राप्त हो-आठ जिसमें बैल हों वह हल धर्म का है छः जिस में हों वह मध्यम जीविका के लिये है ॥८॥ चार जिस में बैल हों वह हिंसकों का है और जिस में दो बैल हों वह हल गोहत्यारे के समान है। दो बैल वाले हल को चौथाई दिन जोते चार बैल के हल को मध्यान्ह तक जोते॥९॥