अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 355, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें२४ पाराशरस्मृतिः ॥
अन्येऽपिवाऽनुगन्तारः पाशच्छेदकराश्चये ॥ ५ ॥
तप्तकृच्छ्रेणशुद्धास्ते कुर्युर्ब्राह्मणभोजनम् ।
अनडुत्सहितांगांच दद्युर्विप्रायदक्षिणाम् ॥ ६ ॥
त्र्यहमुष्णंपिबेद्वारि त्र्यहमुष्णंपयःपिबेत् ।
त्र्यहमुष्णंपिबेत्सर्पिर्वायुभक्षोदिनत्रयम् ॥७॥
षट्पलंतुपिबेदंभस्त्रिपलंतु पयःपिबेत् ।
पलमेकंपिबेत्सर्पिस्तप्तकृच्छ्रंविधीयते ॥ ८ ॥
योवैसमाचरेद्विप्रः पतितादिष्वकामतः ।
पञ्चाहंवादशाहंवा द्वादशाहमथापिवा ॥ ९ ॥
मासार्द्धमासमेकंवा मासद्वयमथापिवा ।
अब्दार्द्धमब्दमेकंवा भवेदूर्ध्वंहितत्समः ॥ १० ॥
त्रिरात्रंप्रथमेपक्षे द्वितीयेकृच्छ्रमाचरेत् ।
तृतीयेचैवपक्षेतु कृच्छ्रं सान्तपनंचरेत् ॥ ११ ॥
चतुर्थेदशरात्रंस्यात्पराकःपञ्चमेमतः ।
अग्नि में दाह करे और जो उस के संग जाय वा जो फांसी काटें ॥५॥ वे तप्त कृच्छ्र व्रत से शुद्ध हुए ब्राह्मणों को भोजन करावें और एक बैल और एक गौ ब्राह्मण को दक्षिणा देवें ॥ ६ ॥ तीन दिन गर्म जल पीवे फिर तीन दिन गर्म दूध पीवे फिर तीन दिन गर्म घी पीवे फिर तीन दिन वायु को भक्षण करके रहे ॥७॥ छः पल जल, तीन पल दूध, एक पल घी, इस को तप्त कृच्छ्र कहते हैं (पांच तोला चारमासे का एक पल होता है) ॥ ८ ॥ जो ब्राह्मण पतित आदिकों के साथ अज्ञान से पांच, दश, वा बारह दिन व्यवहार करता है ॥९॥ पन्द्रह दिन, वा एक महीना, वा दो महीने, वा चार महीने, वा एक वर्ष, तक पतित के साथ व्यवहार करे वह उस प्रायश्चित्त को करै जो आगे कहेंगे और एक वर्ष से अधिक व्यवहार करे तो वह भी उसी पतित के तुल्य (पतित) हो जाता है ॥ १० ॥ पांच दिन पतित का संग करने में तीन दिन उपवास, दश दिन करने में एक कृच्छ्र, बारह दिन के संग में शान्तपन कृच्छ्र करे ॥ ११ ॥ पन्द्रह दिन के संग में दश दिन का व्रत एक महीने के संग में पराक व्रत,