भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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पराशरस्मृतिः ॥

अपृष्ट्वाचैवभर्त्तारं यानारीकुरुतेव्रतम् ।
सर्वंतद्राक्षसान्गच्छेदित्येवंमनुरब्रवीत् ॥ १९ ॥
बान्धवानांसजातीनां दुर्वृत्तंकुरुतेतुया ।
गर्भपातंचयाकुर्यान्न तांसंभाषयेत्क्वचित् ॥ २० ॥
यत्पापं ब्रह्महत्याया द्विगुणं गर्भपातने ।
प्रायश्चित्तंनतस्यास्ति तस्यास्त्यागोविधीयते ॥ २१ ॥
नकार्यमावसथ्येन नाग्निहोत्रेणवापुनः ।
सभवेत्कर्मचाण्डालो यस्तुधर्मपराङ्मुखः ॥ २२ ॥
ओघवाताहृतंबीजं यस्यक्षेत्रेप्ररोहति ।
सक्षेत्रीलभतेबीजं नबीजीभागमर्हति ॥ २३ ॥
तद्वत्परस्त्रियःपुत्रौ द्वौसुतौकुण्डगोलकौ ।
पत्यौजीवतिकुण्डस्तु मृतेभर्त्तरिगोलकः ॥ २४ ॥
औरसःक्षेत्रजश्चैव दत्त:कृत्रिमकःसुतः ।


जो स्त्री अपने पति को पूछे बिना व्रत करती है वह सब राक्षसों को मिलता है यह मनुजी ने कहा है ॥१९॥ जो स्त्री अपने सजातीय बांधवों के संग दुष्ट आचरण वा गर्भपात करती है उस के संग कभी भी पति न बोले ॥ २० ॥ जो पाप ब्रह्महत्या का है उस से दूना गर्भ के पात (गिराने) में है उस गर्भघातिनी का प्रायश्चित्त कुछ नहीं है किन्तु उस का त्याग कर देवे ॥ २१ ॥ उस गर्भपात करने वाली पत्नी के त्याग से श्रौत स्मार्त्त अग्निहोत्र भले ही छूट जाय कुछ चिन्ता न करे किन्तु उस स्त्री के साथ अग्निहोत्र करने वाला धर्म विरोधी होने से कर्मचाण्डाल माना जायगा ॥ २२ ॥

आंधी रूप वायु के वेग से उड़कर आया बीज यदि दूसरे के खेत में उपज आवे तो वह खेत वाले का ही भाग होगा और बीज वाले को उस का भाग मिलना योग्य नहीं ॥ २३ ॥ इसी प्रकार अन्यपुरुष के बीज से दूसरे की स्त्री में जो पुत्र उत्पन्न हो वह भी उस का होगा जिस की वह स्त्री हो सो ऐसे कुण्ड और गोलक दो पुत्र होते हैं एक पति के जीते जो जार से उत्पन्न हो वह कुण्ड और पति के मरे पीछे होय तो गोलक कहाता है ॥ २४ ॥ औरस, क्षेत्रज, दत्तक, और कृत्रिम ये चार पुत्र कहाते हैं । जिस को माता वा पिता