अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 360, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाधर्मसंहिता ॥ २९
समुद्रदर्शनाद्वापि शुनादष्टःशुचिर्भवेत् ॥ २ ॥
वेदविद्याव्रतस्नातः शुनादष्टोद्विजोयदि ।
सहिरण्योदकेस्नात्वा घृतंप्राश्यविशुद्ध्यति ॥ ३ ॥
सव्रतस्तुशुनादष्टस्त्रिरात्रंसमुपोषितः ।
घृतंकुशोदकंपीत्वा व्रतशेषंसमापयेत् ॥ ४ ॥
अव्रतःसव्रतोवापि शुनादष्टोभवेद्विजः ।
प्रणिपत्यभवेत्पूतो विप्रैश्चानुनिरीक्षितः ॥ ५ ॥
शुनाघ्राताऽवलीढस्य नखैर्विलिखितस्यच ।
अद्भिःप्रक्षालनंप्रोक्तमग्निनाचोपचूलनम् ॥ ६ ॥
ब्राह्मणीतुशुनादष्टा जम्बुकेनवृकेणवा ।
उदितंसोमनक्षत्रं दृष्ट्वासद्यःशुचिर्भवेत् ॥ ७ ॥
कृष्णपक्षेयदासोमो नदृश्येतकदाचन ।
यांदिशंव्रजतेसोमस्तांदिशंचाऽवलोकयेत् ॥ ८ ॥
असदब्राह्मणकेग्रामे शुनादष्टोद्विजोत्तमः ।
से वा समुद्र के दर्शन से शुद्ध होता है ॥ २ ॥ वेद विद्या पढ़े वा ब्रह्मचर्य व्रत पूरा करके समावर्त्तन स्नान किये गृहस्थ ब्राह्मण को यदि कुत्ता काटे तो वह सुवर्ण सहित जल से स्नान कर और घी खाके शुद्ध होता है ॥ ३ ॥ यदि व्रत वाले ब्राह्मण को कुत्ता काटे तो तीन दिन रात उपवास करै फिर घृत और कुशों के जल को पीकर शेष व्रत को पूरा करदेवे ॥ ४ ॥ व्रत वाले वा बिना व्रत वाले कैसे ही द्विज को कुत्ता काटे तो ब्राह्मणों को प्रणिपात (नमस्कार) करने और तपस्वी ब्राह्मणों के देखनेसे शुद्ध होता है॥५॥ जो वस्तु कुत्तेने सूंघा, वा चाटा हो, वा नखों से खोदा हो वह जल से धोने और अग्नि में तपाने से शुद्ध होती है ॥६॥ यदि ब्राह्मणी को कुत्ता वा गीदड़ वा भेड़िया काटे तो उदय हुए चन्द्रमा और नक्षत्रों को देख कर शुद्ध होती है ॥७॥ यदि कृष्णपक्ष में कभी चन्द्रमा न दीखे तो जिस दिशा को चन्द्रमा उदय हो कर जाता है उस दिशा को देख लेवे ॥ ८ ॥ जिस में ब्राह्मण कोई न हो वा ब्रह्मतेज से हीन दुराचारी ब्राह्मण रहते हों ऐसे ग्राम में यदि ब्राह्मण को कुत्ता काटे