भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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पृष्ठ 364

भाषार्थसहिता ॥ ३३

अन्तर्जलेउभेसंध्ये प्राणायामेनशुद्ध्यति ॥ ४ ॥ गृध्रश्येनशशादीनामुलूकस्यचघातकः । अपक्वाशीदिनंतिष्ठे त्त्रिकालंमारुताशनः ॥ ५ ॥ वल्गुणीचटकानांच कोकिलाखञ्जरीटकान् । लावकान्रक्तपादांश्च शुद्ध्येतेनक्तभोजनात् ॥ ६ ॥ कारण्डवचकोराणां पिङ्गलाकुररस्यच । भारद्वाजादिकंहत्वा शिवंसंपूज्यशुद्ध्यति ॥ ७ ॥ भेरुण्डचाषभासांश्च पारावतकपिञ्जलौ । पक्षिणांचैवसर्वेषामहोरात्रमभोजनम् ॥ ८ ॥ हत्वामूषकमार्जारसर्पांऽजगरडुण्डुभान् । कृसरंभोजयेद्विप्रान्मोहदण्डंचदक्षिणाम् ॥ ९ ॥ शिशुमारंतथागोधां हत्वाकूर्मंचशल्यकम् । वृन्ताकफलभक्षीवाऽप्यहोरात्रेणशुद्ध्यति ॥ १० ॥ वृकजम्बुकऋक्षाणां तरक्षूणांचघातकः।


तीतर इन को जो मारे वह दोनों संध्या (प्रातःकाल और सायंकाल) ओं में जल के भीतर प्राणायाम करने से शुद्ध होता है ॥ ४ ॥ गीध, बाज, खरहा, और उल्लू इन को जो मारे वह दिनभर पका अन्न न खावे किन्तु तीनों काल वायु भक्षण करता हुआ खड़ा रहे ॥ ५ ॥ बलगुणी, चटका, कोइल, खंजरीट, (खंजन) लावक (लवा) रक्तपग वाले इन को मार कर दिन को अपादिव्रत तथा रात को भोजन करने से शुद्ध होता है ॥ ६ ॥ कारंडव (हंस का भेद) चकोर, पिंगला, (छोटा उल्लू) कुरर (कुररी) भारद्वाज (व्याघ्राट) आदि को मार कर शिव जी का पूजन करने से शुद्ध होता है ॥ ७ ॥ भेरुण्ड (भुरड) पपीहा, भास, पारावत, कपिंजल, और अन्य सब पक्षियों को मार कर एक दिन रात भोजन न करे ॥ ८ ॥ मूसा, बिलाव, सांप, अजगर, डुंडुभ, को मारने वाला ब्राह्मणों को खिचड़ी जिमाकर लोहे का डंडा दक्षिणा में देवे ॥ ९ ॥ शिशुमार, गोह, कछुआ, सेही, इनको जो मारे वह और जो बैंगन खाय वह एक दिन रात व्रत उपवास करने से शुद्ध होता है ॥ १० ॥ भेड़िया, गीदड़, रीछ, तरक्षु (चीता) इन को जो मारे वह ब्राह्मणको एक सेर भर तिल