भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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३५ पराशरस्मृतिः ॥

तिलप्रस्थंद्विजेदद्याद्वायुभक्षोदिनत्रयम् ॥ ११ ॥ गजस्यचतुरङ्गस्य महिषोष्ट्रनिपातने । प्रायश्चित्तमहोरात्रं त्रिसंध्यमवगाहनम् ॥ १२ ॥ कुरङ्गं वानरं सिंहं चित्रंव्याघ्रञ्चघातयेत् । शुद्ध्येतसत्रिरात्रेण विप्राणांतर्पणेनच ॥ १३ ॥ मृगरोहिद्वराहाणामवेर्बस्तस्यघातकः । अफालकृष्टमश्नीयादहोरात्रमुपोष्यसः ॥ १४ ॥ एवंचतुष्पदानांच सर्वेषांवनचारिणाम् । अहोरात्रोषितस्तिष्ठेज्जपन्वैजातवेदसम् ॥ १५ ॥ शिल्पिनंकारुकंशूद्रं स्त्रियंवायस्तुघातयेत् । प्राजापत्यद्वयंकृत्वा वृषैकादशदक्षिणा ॥ १६ ॥ वैश्यंवाक्षत्रियंवापि निर्दोषंयोऽभिघातयेत् । सोऽतिकृच्छ्रद्वयंकुर्याद् गोविंशंदक्षिणांददेत् ॥ १७ ॥ वैश्यंशूद्रंक्रियासक्तं विकर्मस्थंद्विजोत्तमम् ।


देवै और तीन दिन वायु मात्र का भक्षण करे अर्थात् उपवास करे ॥ ११ ॥ हाथी, घोड़ा, भैंसा, ऊंट, इन को जो मारे वह एक दिन रात उपवास करे और त्रिकाल स्नान करै ॥ १२ ॥ कुरंग मृग, वानर, सिंह, चीता, बाघ, इनको जो मारै वह तीन दिन रात व्रत करने और ब्राह्मणों को भोजन कराने से शुद्ध होता है ॥ १३॥ हरिण, लालमृग, सूकर, भेड़, बकरा, इन को जो मारे वह एक दिन रात उपवास करके उस अन्न को खाय जो बिना जोते पैदा हुआ हो ॥ १४ ॥ इसी प्रकार सब चौपाये और सब वन के विचरने वाले जीवों को मार कर जातवेदस अग्नि के मंत्र काजप करता हुआ एक दिन रात खाड़ रह के उपवास करे ॥१५॥ शिल्पी, कारीगर, शूद्र, और स्त्री इनको जो मारडाले, वह दो प्राजापत्य करके दश गौ ग्यारहवां बैल दक्षिणा में देवै ॥१६ ॥ निर्दोष वैश्य वा क्षत्रिय को जो मार डाले वह दो अतिकृच्छ्र व्रत करै और बीस गौ दक्षिणा में देवै ॥१७॥ शुभ कर्म में तत्पर वैश्य वा शूद्र को और निन्दित कर्म करने वाले ब्राह्मण को जो मार डाले वह चांद्रायण व्रत करै और तीस