भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 366, कुल 805 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 366

भाषार्थसहिता ॥ ३५

हत्वाचान्द्रायणं कुर्यात् त्रिंशद्गाश्चैव दक्षिणा ॥ १८ ॥ चाण्डालं हतवान्कश्चिद् ब्राह्मणोयदि कञ्चन । प्राजापत्यं चरेत्कृच्छ्रं गोद्वयंदक्षिणां ददेत् ॥ १९ ॥ क्षत्रियेणापि वैश्येन शूद्रेणैवेतरेण च । चाण्डाले वधसंप्राप्ते कृच्छ्रार्द्धेन विशुद्ध्यति ॥ २० ॥ चौरः श्वपाकश्चाण्डालो विप्रेणाभिहतो यदि । अहोरात्रोषितः स्नात्वा पञ्चगव्येन शुद्ध्यति ॥ २१ ॥ श्वपाकं चापि चाण्डालं विप्रः संभाषते यदि । द्विजैः संभाषणं कुर्यात्सावित्रीं च सकृज्जपेत् ॥ २२ ॥ चाण्डालैः सह सुप्तं तु त्रिरात्रमुपवासयेत् । चाण्डालैकपथं गत्वा गायत्रीस्मरणाच्छुचिः ॥ २३ ॥ चाण्डालदर्शने सद्य आदित्यमवलोकयेत् । चाण्डालस्पर्शने चैव सचैलं स्नानमाचरेत् ॥ २४ ॥ चाण्डालखातवापीषु पीत्वा सलिलमग्रजः । अज्ञानात्त्रिकनक्तेन त्वहोरात्रेण शुद्ध्यति ॥ २५ ॥ चाण्डालभाण्डसंस्पृष्टं पीत्वा कूपगतं जलम् ।


गो दक्षिणा में देवे ॥ १८ ॥ यदि कोई ब्राह्मण किसी चांडाल को मार डाले तो कृच्छ्र प्राजापत्य व्रत करे और दो गौ दक्षिणा में देवे ॥ १९ ॥ यदि क्षत्रिय वैश्य वा शूद्र वा अन्य कोई वर्णसंकर ये चांडाल को मार डालें तो आधा कृच्छ्र व्रत करने से शुद्ध होते हैं ॥ २० ॥ यदि कोई ब्राह्मण, चौर श्वपाक, चांडाल इन को मार डाले तो एक दिन रात उपवास पूर्वक स्नान करके पञ्चगव्य पीने से शुद्ध होता है ॥ २१ ॥ यदि श्वपाक और चांडाल इन के संग ब्राह्मण संभाषण करे तो ब्राह्मणों के साथ संभाषण करके एक बार गायत्री जपै ॥ २२ ॥ जो ब्राह्मण चांडाल के संग सोवे तो तीन दिन उपवास करने से और चांडाल के संग एक मार्ग में चलै तो गायत्री के स्मरण से शुद्ध होता है ॥ २३ ॥ चाण्डाल का दर्शन करे तो शीघ्र ही सूर्य्य का दर्शन करै और चांडाल का स्पर्श करे तो सचैल स्नान करे ॥ २४ ॥ चाण्डाल की खोदी बावड़ी वा कुआ में अज्ञान से ब्राह्मण जल पीवे तो एक रात भर और जान कर पीवे तो एक दिन रात व्रत करने से शुद्ध होता है ॥ २५ ॥ जिस कूप में चाण्डाल के