भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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५८ पराशरस्मृतिः ॥

हलेवाशकटेपङ्क्तौ भारेवापीडितोनरैः ॥ ७ ॥ गोपतिर्मृत्युमाप्नोति यौक्त्रोभवतितद्वधः । मत्तः प्रमत्त उन्मत्तश्चेतनोवाऽप्यचेतनः ॥ ८ ॥ कामतोऽकामकृतक्रोधो दण्डैर्हन्यादथोपलैः । मृते वाऽमृतावापि तद्धिहेतुर्निपातने ॥ ९ ॥ अङ्गुष्ठमात्रस्थूलस्तु बाहुमात्रःप्रमाणतः । आर्द्रस्तुसपलाशश्च दण्डइत्यभिधीयते ॥ १० ॥ मूर्च्छितःपतितोवापि दण्डेनाभिहतःसतु । उत्थितस्तुयदागच्छेत्सप्तवापदशाथवा ॥ ११ ॥ ग्रासंवायदिगृह्णीयात्तोयंवापिपिबेद्यदि । पूर्वव्याध्युपसृष्टश्चेत्प्रायश्चित्तंनविद्यते ॥ १२ ॥ पिण्डस्थेपादमेकंन्तु द्वौपादौगर्भसंमिते । पा दोनंव्रतमुद्दिष्टं हत्वागर्भमचेतनम् ॥ १३ ॥ पादेऽङ्गरोमवपनं द्विपादेश्मश्रुणोऽपिच ।

दो चार बैलों की पांति में बांधने पर, बोझा लादने पर, मनुष्यों से पीड़ा को प्राप्त हुआ ॥७॥ बैल मरजाय तो उस वध को यौक्त्र कहा है । जो मनुष्य मत्त, प्रमत्त, उन्मत्त,चेतन वा अचेतन दशा में हो ॥ ८ ॥ समझ कर वा बिना समझे क्रोध करके दंडों से वा पत्थरों से गौ पर प्रहार करै और वह गौ मरजाय तो उसे निपातन ( मरण ) का हेतु कहते हैं ॥ ९ ॥ अंगूठे भर मोटा और भुजा की बराबर लंबा, गीला,और पत्तों वाला जो हो उसे दंड कहते हैं ॥१०॥

मूर्च्छा को प्राप्त हुआ, वा पड़ा हुआ, वा दंड से ताड़ा हुआ वह बैल जो पांच व सात अथवा दश पग तक उठकर चलै ॥ ११ ॥ अथवा एक ग्रास खालेवे वा जल पीले वै और पहिले से उस को कोई रोग हो तो ऐसी हिंसा का प्रायश्चित्त नहीं है ॥ १२ ॥ यदि गोलाकार पिंडी मात्र बने गर्भ को गिरावै तो पाद कृच्छ्र व्रत, कुछ २ गर्भ का आकार बनजाने पर गर्भपात कराने में आधा कृच्छ्र व्रत, और ठीक २ बने अचेतन गर्भ को गिरावै तो पौन कृच्छ्र व्रत प्रायश्चित्त करै ॥ १३ ॥ पादकृच्छ्र प्रायश्चित्त में शरीर के रोम मुंडावे,