अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 390, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥
त्रिपादेतुशिखावर्जं सशिखंतुनिपातने ॥ १४ ॥ पादैवस्त्रयुगंचैव द्विपादेकांस्यभाजनम् । त्रिपादेगोवृषंदद्याच्चतुर्थेगोद्वयंस्मृतम् ॥ १५ ॥ निष्पन्नसर्वगात्रेषु दृश्यतेवासचेतनः । अङ्गप्रत्यङ्गसंपूर्णो द्विगुणं गोव्रतंचरेत् ॥१६ ॥ पाषाणेनैवदण्डेन गावोयेनाभिघातिताः । शृङ्गभङ्गेचरेत्पादं द्वौपादौनेत्रघातने ॥ १७ ॥ लाङ्गूलेपादकृच्छ्रंतु द्वौपादावस्थिभञ्जने । त्रिपादंचैवकर्णंतु चरेत्सर्व्वनिपातने ॥ १८ ॥ शृङ्गभङ्गेऽस्थिभङ्गेच कटिभङ्गेतथैवच । यदिजीवतिषण्मासान्प्रायश्चित्तंनविद्यते ॥ १९ ॥ व्रणभङ्गेचकर्त्तव्यः स्नेहाभ्यङ्गस्तुपाणिना ।
आधे कृच्छ्र व्रत में दाढ़ी मूंछे भी मुंडावे, त्रिपाद (पौन) व्रत में शिखा को छोड़कर मुंडावे और पूरे कृच्छ्र व्रत में शिखा सहित बालों को मुंडावे ॥ १४॥
चौथाई व्रत में दो वस्त्र, आधे व्रत में कांसे का पात्र, त्रिपाद (पौन) व्रत में एक बैल, और चौथे पूर्ण प्रायश्चित्त में दो गौ दक्षिणा देवे ॥ १५ ॥ यदि सब अंग जिस के बन गये हों ऐसा अंग प्रत्यंगों सहित पूरा २ चेतन गर्भ दीखता हो तो उस के गिराने में पूर्व कहे गोवध के प्रायश्चित्त से दूना प्रायश्चित्त करै॥१६॥
पत्थर वा दंड से जिसने गौ को ताड़ना की हो उस से यदि सींग टूट जाय तो पादव्रत, और नेत्र फूटजाय तो आधा व्रत प्रायश्चित्त करै ॥ १७ ॥ पूंछ टूट जावे तो चौथाई व्रत, हाड़ टूट जाय तो आधा व्रत, कान टूट जाय तो तीन पाद (पौन) व्रत और उस पशु के मरजाने पर संपूर्ण प्रायश्चित्त करै ॥ १८ ॥
सींग टूटने पर, वा गोड़ आदि का हाड़ टूटने पर, छः महीने तक जीवित रहे तो प्रायश्चित्त नहीं है अर्थात् १७ । १८ । श्लोकों में कहे प्रायश्चित्त सींगादि टूटने पर छः महिने से पहिले पशु के मरने पर जानो ॥ १९ ॥ यदि बैलादि के घाव हो जाय तो हाथ से उस घाव पर तैलादि दवा लगाया करे