भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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२२भाषाऽर्थसहिता-

सप्ताहेनतुकृच्छ्रोयं महासांतपनंस्मृतम् ।
त्र्यहंसायं त्र्यहंप्रातस्त्र्यहंभुङ्क्तत्वयाचितम् ॥११७॥
त्र्यहंपरंचनाश्नीयात्प्राजापत्योविधिःस्मृतः ।

सायंतुद्वादशग्रासाः प्रातःपंचदशस्मृताः ॥११८॥
अयाचितैश्चतुर्विंश परैस्त्वनशनंस्मृतम् ।
कुक्कुटाण्डप्रमाणंस्याद् यावद्वास्याविशेन्मुखे ॥११९॥
एतद्ग्रासंविजानीया-च्छुद्ध्यर्थं कायशोधनम् ।

त्र्यहमुष्णंपिवेदाप-स्त्र्यहमुष्णंपिवेत्पयः ॥ १२० ॥
त्र्यहमुष्णंघृतंपीत्वा वायुभक्षोदिनत्रयं ।

षट्पलानि पिवेदाप-स्त्रिपलं तुपयः पिवेत्* ॥१२१॥
पलमेकंतुवैसर्पि-स्तप्तकृच्छ्रं विधीयते ।

त्र्यहंतुदधिनाभुङ्क्ते त्र्यहंभुङ्क्तेचसर्पिषा ॥१२२॥


यह सात दिन में महासांतपनकृच्छ्र कहा है तीन दिन सायंकाल में तीन दिन प्रातःकाल में भोजन करे तथा तीन दिन बिना मांगे जो मिले उसे भोजन करे ॥ ११७ ॥ और अन्त के तीन दिनों में सर्वथा भोजन न करे यह प्राजापत्य की विधि कही है--सायंकाल को बारह ग्रास और प्रातःकाल को पन्द्रह कहे हैं ॥११८॥ बिना याचना के तीन दिनों में चौबीस ग्रास खाने से श्रेष्ठ ऋषियों ने अनशन व्रत कहा है मुर्गे के अण्डे के समान एक ग्रास का प्रमाण होवे अथवा जितना व्रती के मुख में मापके वही उसका एक ग्रास है ॥ ११९ ॥ शुद्धि के अर्थ इसे ग्रास जाने और यही देह की शुद्धि करने वाला है-तीन दिन गर्म जल पीवे और तीन दिन गर्म दूध पीवे ॥ १२० ॥ तीन दिन गरम घी पीकर अन्त के-तीन दिन वायु का भक्षण करे, छः पल जल पीवे और तीन पल दूध पीवे ॥ १२१ ॥ एक पल घी पीवे इसे तप्त-कृच्छ्रव्रत कहते हैं-तीन दिन दही भोजन करे और तीन दिन घी ॥ १२२ ॥

* चार तोला का एक पल कहाता है ॥