भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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अत्रिसमृतिः ॥ =३

क्षीरेणत्र्यहंभुङ्क्ते वायुभक्षोदिनत्रयम् । त्रिपलं दधिक्षीरेण पलमेकंतुसर्पिषा ॥१२३॥ एतदेवव्रतंपुण्यं वैदिकंकृच्छ्रमुच्यते । एकभक्तेननक्तेन तथैवायाचितेनच ॥१२४॥ उपवासेनचैकेन पादकृच्छ्रं प्रकीर्तितम् । कृच्छ्रातिकृच्छ्रः पयसा दिवसानेकविंशतिः ॥१२५॥ द्वादशाहापवासेन पराकःपरिकीर्तितः । पिण्याकश्चामतक्रांबु सक्तूनांप्रतिवासरम् ॥ १२६ ॥ एकैकमुपवासःस्या-त्सौम्यकृच्छ्रःप्रकीर्तितः । एषां त्रिरात्रमभ्यासा-देकैकस्ययथाक्रमम् ॥ १२७ ॥ तुलापुरुषइत्येष ज्ञयःपंचदशान्हिकः । कपिलायास्तुदुग्धाया धारोष्णंयत्पयःपिबेत् ॥ १२८ ॥ एषश्यामकृतःकृच्छ्रः श्वपाकमपिशोधयेत् । निशायांभोजनंचैव तज्ज्ञेयंनक्तमेवतु ॥ १२९ ॥


तीन दिन दूध को और तीन दिन वायु को भक्षण करे, दही और दूध तीन २ पल और घी एक पल भोजन करे ॥१२३॥ यही पवित्र और वेदोक्त कृच्छ्रव्रत कहा है-एक दिन हविष्य वस्तु का भोजन करे द्वितीयदिनबिना मांगे जो पदार्थ मिलेउसकाभोजन करे ॥१२४॥ और एक तीसरे दिन अन्त में उपवास करने से यह तीन दिन का पादकृच्छ्र कहा है-दूध को ही पीकर इक्कीसदिन बिताने से कृच्छ्रातिकृच्छ्रव्रत कहा है १२५॥ बारह दिन के उपवास से पराक व्रत कहा है, खली-कच्चामठा जल और सत्तू इन को क्रम से एक २ दिन खावे।१२६। और एक उपवास करै इसे सौम्यकृच्छ्र कहते हैं। इन पांचों में से एक २ के तीन दिन क्रम से अभ्यास करने से ॥१२७॥ यह पंद्रह दिन का तुला पुरुषव्रत है दुही हुई कपिला गौ के धारोष्ण दूध को जो पीवे ॥१२८॥ यह श्याम जी कृत (किया) कृच्छ्रव्रत चांडाल को भी शुद्ध करता है रात्रि में ही जो भोजन हो उसे नक्त कहते हैं ॥ १२९ ॥