भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषार्थसंहिता ॥ ६१

अन्यत्राङ्कनलक्ष्मभ्यां वहनेदोहनेतथा । सायंसंगोपनार्थंच नदुष्येद्रोधबन्धयोः ॥२७ ॥ अतिदाहेऽतिवाहेच नासिकाभेदनेतथा । नदीपर्वतसंचारे प्रायश्चित्तंविर्निदिशेत् ॥ २८ ॥ अतिदाहेचरेत्पादं द्वौपादौवाहनेचरेत् । नासिक्येपादहीनंतु चरेत्सर्व्वनिपातने ॥२९ ॥ दहनात्तुविपद्येत अनड्‌वान्योक्त्रयन्त्रितः । उक्तंपराशरेणैव ह्येकंपादंयथाविधि ॥ ३० ॥ रोधनंबन्धनंचैव भारःप्रहरणंतथा । दुर्गप्रेरणयोक्त्रंच निमित्तानिवधस्यषट् ॥ ३१ ॥ बन्धपाशसुगुप्ताङ्गो म्रियतैयदिगोपशुः। भुवनेत्तस्यनाशस्य पापेकृच्छ्रार्द्धमर्हति ॥ ३२ ॥


दाग देने ( अङ्कित करने ) वा चिह्न लगाने, जोतने तथा दुहने में और सायं- काल रात्रि में रक्षा करने के लिये रोकने बांधने में गौओं को जो कुछ कष्ट हो वा कोई गौ दैवयोग से मर भी जायतो दोष नहीं लगेगा ॥ २७ ॥ दाग देने में अत्यन्त जलाने, वा बहुत काल तक सख्ती से हलादि में जोतने पर, नाथने में और नदी में घुसाने तथा पर्वत पर चढ़ाने पर यदि बैल मर जाय तो निम्न लिखित प्रायश्चित्त जानो ॥ २८ ॥ दाग ने से मरने पर चौ- थाई, जोतने से मरने पर आधा, नाथने से मरने पर पौना और नदी पर्व- त पर घुसाने चढ़ाने से मरने पर पूरा प्रायश्चित्त करे ॥ २९ ॥ यदि रस्सी से बांधे हुए बैल को गिरा कर दाग देने मात्र से मर जावे तो महर्षि पराशर की सम्मत्यनुसार चौथाई प्रायश्चित्त करे ॥ ३० ॥ रोकना, बांधना, बोझाला- दना, लकड़ी आदि से मारना पीटना, किसी कठिन जगह नदी आदि में घुसाना वा चढ़ाना, और नाथ डालने आदि के लिये गिराने को रस्सी आ- दि से बांधना इन ६ निमित्तों से बैल आदि पशु की हिंसा होती है ॥३१॥ खूंटी पर बांधा हुआ रस्सी की फांसी लग कर यदि बैल मर जावे । तब घर में उस बैल के नाश का पाप लगने पर आधा कृच्छ्र व्रत प्रायश्चित्त करे ॥३२॥