भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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७८ | पराशरस्मृतिः ॥

ब्रह्मकूर्चोपवासेन यथावर्णस्यनिष्कृतिः ॥ २७ ॥
शूद्राणांनोपवासःस्याच्छूद्रोदानेनशुद्ध्यति ।
ब्रह्मकूर्चमहोरात्रं श्वपाकमपिशोधयेत् ॥ २८ ॥
गोमूत्रंगोमयंक्षीरं दधिसर्पिःकुशोदकम् ।
निर्दिष्टंपञ्चगव्यंच पवित्रंपापशोधनम् ॥ २९ ॥
गोमूत्रंकृष्णवर्णायाः श्वेतायाश्चैवगोमयम् ।
पयश्चताम्रवर्णाया रक्तायागृह्यतेदधि ॥ ३० ॥
कपिलायाघृतंग्राह्यं सर्वंकापिलमेववा ।
मूत्रमेकपलंदद्यादङ्गुष्ठाद्धंतुगोमयम् ॥ ३१ ॥
क्षीरंसप्तपलंदद्याद्दधित्रिपलमुच्यते ।
घृतमेकपलंदद्यात्पलमेकंकुशोदकम् ॥ ३२ ॥
गायत्र्यादायगोमूत्रं गन्धद्वारेतिगोमयम् ।


चाहें तो ब्रह्मकूर्च रूप उपवास से यथा योग्य भिन्न २ प्रकार वर्णों का प्राय- श्चित्त जानो ॥२७॥ शूद्रों के लिये ब्रह्मकूर्चादि का पान वा उपवास करना निषिद्ध है किन्तु शूद्रदान करने से शुद्ध हो जाता है । ब्राह्मणादि द्विज पु- रुष एक दिन रात ब्रह्मकूर्च उपवास करे तो चाण्डाल के तुल्य लगे दोष को भी यह व्रत शुद्ध कर देता है ॥ २८ ॥ (अब तक पूर्व में कई बार ब्रह्मकूर्च उप- वास का प्रसंग आचुका है सो अब यहां से ४० श्लोक तक ब्रह्मकूर्च का विधान कहते हैं सो जहां २ ब्रह्मकूर्च कहा है वहां २ इसी विधान को जान लेना ) गो मूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोदधि, गोग्हृत, और कुशों को पीस कर नि- चोड़ा जल इस प्रकार कुशोदक और पञ्चगव्य का निम्न रीति से सेवन करना परम पवित्र होने से पापों का शोधन करने वाला है ॥ २९ ॥ काली गौ का गोमूत्र लेवे, श्वेत गौ का गोबर लेवे, ताम्र वर्ण गौ का दूध लेवे, लाल गौ का दही ॥ ३० ॥ कपिला गौ का घी लेना चाहिये । अथवा गो मूत्रादि सभी कपिला गौ का लेवे । एक पल ( चार तोला ) गोमूत्र, अपने आधे अंगूठे भर गोबर ॥ ३१ ॥ सात पल ( अट्ठाईश तोला ) गौ का दूध लेवे, तीन पल ( १२ तोला ) दही, एक पल ( ४ तोला ) घी और एक पल कुशोदक लेवे ॥ ३२ ॥ ( तत्सवितु० ) गायत्री से गोमूत्र, ( गन्धद्वारां० ) लक्ष्मीसूक्त के मन्त्र से