भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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भाषार्थसहिता ॥ ९५

आप्यायस्वेतिचक्षीरं दधिक्राव्णस्तथादधि ॥ ३३ ॥
तेजोसिशुक्रमित्याज्यं देवस्यत्वाकुशोदकम् ।
पञ्चगव्यमृचापूतं स्थापयेदग्निसन्निधौ ॥ ३४ ॥
आपोहिष्ठेतिचालोढ्य मानस्तोकेतिमन्त्रयेत् ।
सप्तावरास्तुयेदर्भा अच्छिन्नाग्राःशुक्त्विषः ॥ ३५ ॥
एतैरुद्धृत्यहोतव्यं पञ्चगव्यंयथाविधि ।
इरावतीइदंविष्णुर्मानस्तोकेचशंवतो ॥ ३६ ॥
एताभिश्चैवहोतव्यं हुतशेषंपिवेद्द्विजः ॥ ३७ ॥
आलोड्यप्रणवेनैव निर्मन्थ्यप्रणवेनतु ।
उद्धृत्यप्रणवेनैव पिबेच्चप्रणवेनतु ॥ ३८ ॥
पत्वगस्थिगतंपापं देहेतिष्ठतिदेहिनाम् ।
ब्रह्मकूर्चोदहेत्सर्वं यथेवाग्निरिवेन्धनम् ॥ ३९ ॥


गोबर, (आप्यायस्व समेतु० यजु० अ० १२ । ११२) मन्त्रसे दूध, (दधिक्राव्णोअकारि० यजु० अ० २३ । ३२) मन्त्रसे दही, (तेजोऽसि शुक्रमस्य० यजु० १ । ३१) मन्त्र से घी, (देवस्यत्वा०-हस्ताभ्यां गृह्णामि । यजु०अ० १।२९) मन्त्र से कुशोदक लेवे । इस प्रकार ऋचाओं से पवित्र किये पञ्चगव्य तथा कुशोदक को लेकर अग्निकुण्ड के समीप स्थापित करे ॥ ३३।३४ ॥ फिर (आपोहिष्ठा० यजु० अ० ११ । ५२) इत्यादि तीन मन्त्रों से गोमूत्रादि सब को मिलाके (आलोडन करके) (मानस्तोके० यजु० अ० १६ । १६) मन्त्र से अभिमन्त्रण करे अर्थात् मन्त्र पढ़ता हुआ गोमूत्रादि को देखे । फिर जिसका अग्रभाग न टूटा हो ऐसे ठोकर हरे कम से कम सात दर्भों से ॥ ३५ ॥ कुशोदक सहित पञ्चगव्य को लेर कर निम्न मन्त्रों से यथाविधि होम करे । (इरावती धेनुमती० यजु०अ० ५।१६) (इदं विष्णुर्विच० यजु० अ०५ । १५) (मानस्तोकेतनये० यजु० अ० १६ । १६) और यजु० अ० ३६ के (शंनो मित्रः०) त्यादि शं शब्द वाले मन्त्रों से ॥३६॥ होम करे फिर होमसे शेष बचे भागको निम्न प्रकार पीये ॥३७॥ ओंकार से आलोडन कर ओंकार से मन्थन कर ओंकार से ही उठाकर तथा ओंकार पढ़ के ही पीवे ॥ ३८ ॥ जो पाप मनुष्यों के शरीर की त्वचा तथा हड्डियों में भी पैठ गया हो उस सब को यह ब्रह्मकूर्च ऐसे ही भस्म कर देता है जैसे कि ईंधन को अग्नि जलावे ॥ ३९॥