भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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८० पराशरस्मृतिः ॥

पवित्रं त्रिषु लोकेषु देवताभिरधिष्ठितम् ।
वरुणश्चैव गोमूत्रे गोमये हव्यवाहनः ।
दध्नि वायुः समुद्दिष्टः सोमः क्षीरे घृते रविः ॥ ४० ॥
पिबतः पतितं तोयं भाजने मुखनिःसृतम् ।
अपेयं तद्विजानीयाद् भुक्त्वा चान्द्रायणं चरेत् ॥ ४१ ॥
कूपे च पतितं दृष्ट्वा श्वशृगालौ च मर्कटम् ।
अस्थिचर्मादिपतिताः पीत्वामेध्या अपो द्विजः ॥ ४२ ॥
नारं तु कुणपं काकं विड्वराहं खरोष्ट्रकम् ।
गावं यं सौप्रतीकं च मायूरं खाड्गकं तथा ॥ ४३ ॥
वैयाघ्रं मार्क्षं सैंहं वा कूपे यदि निमज्जति ॥ ४४ ॥
तडागस्याऽपि दुष्टस्य पीतं स्यादुदकं यदि ॥
प्रायश्चित्तं भवेत्पुंसः क्रमेणैतेन सर्वशः ॥ ४५ ॥
विप्रः शुद्ध्येत्त्रिरात्रेण क्षत्रियस्तु दिनद्वयात् ।
एकाहेन तु वैश्यश्च शूद्रानक्तेन शुद्ध्यति ॥ ४६ ॥
परपाकनिवृत्तस्य परपाकरतस्य च ।


यह ब्रह्मकूर्च्च अनेक देवताओं से अधिष्ठित होने से तीनों लोक में अति पवित्र है। गो मूत्र में वरुण देवता, गोबर में अग्नि, दही में वायु, दूध में सोम, और घी में सूर्य नारायण विराजते हैं ॥ ४० ॥ जल पीने समय मुख से निकल के जलपात्र में जूठा जल गिर जाय तो वह पात्रका जल पीने योग्य नहीं है। यदि उस को पीलेवै तो चान्द्रायण व्रत करे ॥४१॥ यदि कुए में कुत्ता, गीदड़, बन्दर, हाड़, चाम आदि गिरे हुए देखकर भी द्विज पुरुष उस अशुद्ध जल को पी लेवे ॥ ४२ ॥ मनुष्य का मुर्दा देह, कौवा, विष्ठा खाने वाला सूअर, गधा, ऊंट, गवय, (नीलगाय) हाथी, मोर, गैंडा, ॥ ४३ ॥ बाघ, रीछ, सिंह, ये यदि कूप में डूब जांय ॥ ४४ ॥ और तालाब का बिगड़ा हुआ खराब दुर्गन्धयुक्त जल भी यदि पीया जाय तो पुरुषों का क्रम से यह निम्न प्रायश्चित्त है कि ॥ ४५ ॥ ब्राह्मण तीन दिन रात, क्षत्रिय दो दिन रात, के उपवास से वैश्य एक दिन रात के उपवास से और शूद्र रातभर के उपवास से शुद्ध होता है ॥ ४६ ॥ जो पुरुष परपाक से निवृत्त हो और जो परपाक रत हो इन दोनोंका और १५ श्लोक